नई दिल्ली।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा संकल्प लिया-देश में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकंडक्टर निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया, तब बहुतों ने इसे एक कठिन सपना माना लेकिन आज वो सपना साकार होता दिख रहा है।
सेमीकंडक्टर चिप्स वेफर जैसे पदार्थों से बनती हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स को ‘सोचने’ और ‘निर्णय लेने’ की क्षमता देती हैं। मोबाइल फोन से लेकर मेट्रो ट्रेन तक-हर स्मार्ट टेक्नोलॉजी इन चिप्स पर निर्भर करती है। भारत अब तक इस तकनीक के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था, लेकिन यह नया संयंत्र इस परिदृश्य को बदलने जा रहा है।
सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत का यह कदम न केवल आयात पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक अहम स्तंभ बनाएगा। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है—“जहां चिप्स हैं, वहीं भविष्य की चाबी है।” और भारत अब उस चाबी को खुद गढ़ रहा है। जेवर में बन रही यह यूनिट केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की नींव है। तकनीक, रोज़गार और आत्मनिर्भरता के संगम से यह पहल आने वाले वर्षों में भारत को न सिर्फ चिप्स का निर्माता बनाएगी, बल्कि वैश्विक इनोवेशन का नेतृत्वकर्ता भी।







