आगरा
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि,आगरा विभाग द्वारा इस रविवार पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यावरण पोषण में “मैं और मेरी भूमिका” विषय पर विचार मंथन कार्यक्रम का आयोजन राव कृष्णपाल ऑडिटोरियम आरबीएस कॉलेज, खंदारी, आगरा पर किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अक्षयपात्र योजना के संस्थापक श्रीमान अनन्त प्रभुजी,विशिष्ट अतिथि हरित ऋषि/ग्रीन मैन ऑफ इंडिया श्री विजयपाल बघेल, मुख्य वक्ता पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अखिल भारतीय सहसंयोजक श्रीमान राकेश जैन जी व कार्यक्रम अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद ब्रज प्रांत के अध्यक्ष सी ए शशि कुमार अग्रवाल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम माता सरस्वती व भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण कर व दीप प्रज्वलित कर की गई। तत्पश्चात मुख्य वक्ता श्रीमान राकेश जैन जी ने बताया कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण की अत्यंत आवश्यकता है।
पेड़ नहीं होंगे तो हम प्राण वायु कहां से प्राप्त करेंगे। भारतवर्ष में प्रति व्यक्ति औसतन अट्ठाइस पेड़ों की आवश्यकता है जिससे प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छ हवा ले सके। उन्होंने बताया कि राजकोट के निकट उषा गोलाजी ने पीपल के करीब पिचासी लाख पेड़ लगाए, उनको पीपल वाली अम्मा भी कहते हैं। हरित प्राण ट्रस्ट भी पेड़ लगा रहा है साथ ही अपने हर मरीज के स्वस्थ होने पर उनको एक पौधा भी भेंट करता है।
उन्होंने बताया कि पॉलीथिन से जल, जंगल, जमीन, जानवर तथा जन सभी को खतरा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमान अनन्तप्रभु जी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता जीवन का अभिन्न अंग है।
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन भी पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित रहा। गौ चराना, यमुना मैया का जल ब्रज की लता-पता, पेड़- पौधे आदि सभी पर्यावरण के अभिन्न अंग रहे। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत गीता के पांचवें अध्याय के उन्नतीसवें श्लोक में पर्यावरण का वर्णन है। उन्होंने कहा कि यह भोग भूमि नहीं है, यह योग भूमि है इसलिए प्रत्येक मनुष्य को पर्यावरण संरक्षण करना चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि हरित ऋषि/ ग्रीनमैन ऑफ इंडिया श्री विजय बघेल ने बताया कि हरे का अर्थ है सांस। विश्व में प्रकृति व पेड़ की पूजा करने वाला इकलौता देश भारत है। मनुष्य अपनी बढ़ती हुई इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए पर्यावरण का अंधाधुंध दोहन कर रहा है इसके लिए प्रकृति हमें क्षमा नहीं करेगी।
हमें अभी से पर्यावरण संरक्षण के प्रति सचेत हो जाना चाहिए,पेड़ पौधे लगाने चाहिए व जल का संरक्षण करना चाहिए। पॉलिथीन का उपयोग न करके हमें कपड़े के थैलों का प्रयोग करना चाहिए। कार्यक्रम अध्यक्ष सी ए शशि कुमार अग्रवाल ने सभी उपस्थितजनों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प करवाया और कहा कि प्रकृति है तो हम हैं अन्यथा पृथ्वी पर जीवन नहीं रहेगा। कार्यक्रम का संचालन विभाग समरसता प्रमुख रमन जी ने किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से बांकेलालजी(संगठन मंत्री,संस्कार भारती,शिवेंद्रजी(प्रांत संयोजक,पर्यावरण संरक्षण गतिविधि),एड अनिल शुक्ला(महानगर संयोजक,छावनी महानगर), पूरन तरकर (महानगर संयोजक,पश्चिमी महानगर),देवेंद्र थापक जी,भुवनजी,राघवेंद्र तिवारीजी,उमादत्तजी, कुशजी,संजय जी,शशिकांत कुलश्रेष्ठजी,संजय गुप्ताजी,जितेंद्र फौजदारजी,विकासजी, कोविद जी, रोमेश जी,कुणालजी,अमित लवानिया ,पूनम सोलंकी आदि पर्यावरणप्रेमी उपस्थित रहे।







