पावन गंगा दशहरा स्नान पर आज पतितपावनी पापनाशनी गंगा में करोड़ों लोग करेंगे स्नान

पावन गंगा दशहरा स्नान पर आज पतितपावनी पापनाशनी गंगा में करोड़ों लोग स्नान करेंगे। गंगा को पुराणों में मोक्षदायिनी माना गया है। पितरों के लिए तारण-कर्त्ता और मनुष्य के पापों का शमन करने वाली गंगा में स्नान का बहुत महत्त्व है। हिंदू धर्म में गंगा स्नान को इतना पुण्यकारी बताया गया है कि हर तीज त्योहार में गंगा स्नान की अनिवार्यता है।

आज के ही दिन सुरसरि गंगा पृथ्वी लोक में अवतरित हुई थीं। राजा भागीरथ की तपस्या के बाद गंगा पृथ्वी पर आने को राजी हुईं। लेकिन ब्रह्मा जी के कमंडल से जब वे निकलीं तब उनका वेग इतना अधिक था कि पृथ्वी क्या कोई भी धरातल उसे सहन नहीं कर पाता। इसलिए शिव ने अपनी जटाएं खोलीं और सुरसरि उन्हीं में उलझ कर रह गईं। पृथ्वी पर एक बूंद नहीं. राजा भागीरथ फिर चिंतित हुए। गंगा न आईं तो उनके 60 हजार पुरखों का तर्पण कैसे होगा?

भागीरथ ने अब शिव जी की तपस्या की. शिव जी प्रसन्न हुए और गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। गंगा के अवतरण की यह कथा पुराणों में मिलती है, किंतु गंगा की धाराओं को देखा जाए तो लगता है, गंगा का प्रवाह ऐसा ही है। हिमालय की तमाम चोटियों, कन्दराओं से निकल कर इस नदी को गंगा नाम देवप्रयाग में मिलता है।

देवप्रयाग में इस नदी की दो धाराएं मिलती हैं। एक तरफ गोमुख से निकली भागीरथी आ रही होती है और दूसरी तरफ से बद्रीनाथ से निकली अलकनंदा। चूंकि देवप्रयाग में दोनों नदियों में पानी समान होता है इसलिए यहां नया नाम मिला गंगा।

गंगा दशहरा पर अगर श्रद्धालु हिंदू यह प्रतिज्ञा करें कि वे गंगा स्नान तो करेंगे और इसके तट पर पुरखों का तर्पण भी करेंगे लेकिन गंगा को प्रदूषित नहीं होने देंगे, तो यह उनकी सबसे बड़ी गंगा सेवा होगी।

SHARE