नई दिल्ली।
8 जून को हर साल “वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे” मनाया जाता है। मोबाइल से भी हो सकता है ब्रेन ट्यूमर? 8 जून को “वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे” पर विशेष जानकारी देते हुए न्यूरोसर्जरी एंड साइबर नाइफ, आर्टिमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के डायरेक्टर डॉ. आदित्य गुप्ता ने बताया कि ये बहुत खतरनाक बीमारी है और इसके बारे में लोगों को जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि ब्रेन ट्यूमर को शुरुआती स्टेज में पहचानना काफी मुश्किल होता है। इसके शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर माइग्रेन या स्ट्रेस से जोड़ लेते हैं। साथ ही, ये लक्षण काफी धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इसलिए भी इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। लेकिन कुछ बातों पर ध्यान देकर इसकी पहचान जल्दी की जा सकती है, जैसे-
सुबह से होने वाला सिरदर्द जो समय के साथ बढ़ता जाए।
चलने में लड़खड़ाहट, हाथ-पैरों का कमजोर होना
याददाश्त में कमी होना, फोकस करने में समस्या, भ्रम, बोलने में कठिनाई आदि।
अचानक बेहोशी या झटके आना, खासकर अगर पहले कभी न हुए हों।
चिड़चिड़ापन, गुस्सा, या असामान्य व्यवहार।
धुंधला दिखना, डबल विजन, या अचानक दिखाई देना बंद होना।
बिना किसी कारण के मतली या उल्टी का आना आदि लक्षण हैं जिनसे इस बीमारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण लगातार बने रहें या बिगड़ते बनते जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
मोबाइल फोन की वजह से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है या नहीं इस पर अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं ह। जब मोबाइल फोन सिर के ज्यादा करीब होता है, जैसे कॉल पर बात करते वक्त, तो उससे लो लेवल के रेडिएशन निकलते हैं। हालांकि, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है कि मोबाइल फोन की वजह से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। लेकिन एहतियात बरतने के लिए फोन को सिर से दूर रखना चाहिए और कॉल पर बात करने के लिए भी स्पीकर मोड या ईयरफोन्स का इस्तेमाल करना चाहिए।
ब्रेन ट्यूमर को लेकर हमारे समाज में कई गलत धारणाएं भी फैली हुई हैं जो अक्सर आधी-अधूरी जानकारी पर आधारित होती हैं। जैसे इंटरनेट और कुछ जगहों पर मिलने वाली अधूरी या गलत जानकारी लोगों में भ्रम और घबराहट पैदा कर देती है।
न्यूरोसर्जरी और हेड – न्यूरो-इंटरवेंशनल, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग दिल्ली, के एसोसिएट डायरेक्टर -डॉ. शैलेश जैन ने बताया कि हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता। कई बार ट्यूमर बेनाइन यानी गैर-कैंसरयुक्त होता है, जो बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है। हालांकि, ये ट्यूमर शरीर में कहीं और नहीं फैलते, फिर भी दिमाग के संवेदनशील हिस्सों पर दबाव बनाकर सिरदर्द, दौरे या आंखों की रोशनी पर असर डाल सकते हैं। इसलिए सही समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी है।





