
चिन्हित छ प्रखंड में सिंथेटिक पाउडर से किया जाना है छिड्काव : डॉ विजय
खगड़िया।
कालाजार उन्मूलन एवं बचाव के लिए जिले में आगामी 21 जुलाई से चिन्हित छ प्रखंडों में सिंथेटिक पाउडर का छिड़काव किया जाना है। इस विषय की जानकारी देते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया की कालाजार बीमारी एक घातक रोग है जो बालू मक्खी के काटने से फैलता है और लीशमैनिया परजीवी के कारण होता है।
यह एक गंभीर बीमारी है जो यकृत, तिल्ली और अस्थि मज्जा को प्रभावित करती है और, यदि इसका इलाज न किया जाए, तो यह घातक भी हो सकती है। इसलिए इस से बचाव के लिए प्रभावित ग्रामों में घर के अंदर, कमरों, गोशालाओं में छिड़काव अवश्य कराये तथा इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करे, क्यूंकि इनके प्रति जन- जागरूकता बहुत ही जरुरी है।
श्री बबलू कुमार सहनी, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार ने बताया की अलौली ,बेलदौर, गोगरी, खगड़िया, मानसी एवं परबत्ता में कालाजार से बचाव हेतु एस.पी. का छिड्काव किया जाना है। कुल 30 ग्रामों में छिड़काव कराया जाना है जिसमें कुल 111086 जनसंख्या को छिड़काव से आच्छादित किया जाना है।
जिसके लिए पत्र द्वारा सभी प्रभारी को निर्देश दिया गया है की वो अपने -अपने क्षेत्र में इस अभियान हेतु आवयशक तैयारी कर लें, जिसमें छिड़काव के लिए टीम का गठन करना, माइक्रो प्लान तैयार करना, टीम को छिड़काव हेतु प्रशिक्षण देने के साथ जिला से आवयशक सामग्री का उठाव करना शामिल है। साथ ही प्रखंड स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना कर सदर मुख्यालय को सूचित करना सुनिश्चित करें।
उन्होंने कालाजार के बारे में बताते हुए कहा की यह बीमारी लोगों को संक्रमित बालू मक्खी के काटने से होती है, जो खुद परजीवी से संक्रमित होकर, किसी अन्य व्यक्ति का खून पीने से परजीवी बन जाती है। वैश्विक स्तर पर सैंडफ्लाई जिसे बालू मक्खी भी कहा जाता है उसकी 90 प्रजातियाँ हैं जिनमें से सिर्फ 01 उन कालाजार परजीवियों को फैलाती हैं।
वहीँ इसका दुसरा रूप पी.के.डी.ल बीमारी जिनका लक्षण, चमड़े पर सफेद दाग आ जाना जिसमें सुनापन का पता चलता है। इस बीमारी से बचने के लिए त्वचा को ढक कर रखें यानि पुरे कपड़े पहने, गंदगी वालेे जगहों पर जाने से बचें, बिस्तर पर सोने से पहले मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें।






