उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम-2025 को मंजूरी, 1 जुलाई 2026 से होगा लागू

देहरादून।

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम-2025 को मंजूरी दे दी गई है। विधानसभा में विपक्षी दलों ने अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक के खिलाफ जमकर हंगामा किया। विपक्षी दल विधेयक को रोकने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हंगामे के बावजूद सरकार विधेयक को सदन से पास कराने में सफल रही।

विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने सदन में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान विधेयक से धारा 14 (ठ) को हटाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को भी स्वीकार करते हुए धारा 14 (ठ) को विधेयक से बाहर किया गया है। राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए मिलता था, लेकिन इस नए विधेयक के तहत सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी।

1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड भंग करके उसकी जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन होगा। राज्य के 452 मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को अब नए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी।

सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और संस्थागत अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगी। मान्यता के लिए संस्थानों का एक्ट में पंजीकरण और संपत्ति उनके नाम पर होना जरूरी होगा।

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