
अहमदाबाद जिले के धोलका तालुका के कोठ गाँव के पास स्थित गणपतिपुरा एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है, जिसकी अपार महिमा और इतिहास है। धोलका से लगभग 25 किलोमीटर और अहमदाबाद से 65-70 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर को लोग ‘गणपतिपुरा’, ‘गणेशपुरा’ या ‘कोठ गणपतिपुरा’ के नाम से जानते हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी महिमा यहाँ विराजमान दाहिनी सूंड वाली गणेश जी की स्वयंभू मूर्ति है, जो पूरे भारत में कम ही देखने को मिलती है। इस 6 फुट ऊँची मूर्ति में गणेश जी का एक दाँत है।
लोककथाओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास पाँच हज़ार साल पुराना है। कहा जाता है कि इस स्थान पर पहले जंगल था और ज़मीन की खुदाई के दौरान एक पेड़ के जाल से गणपति दादा की मूर्ति निकली थी। इस मूर्ति को लेने के लिए कोठ, रोजका और वैंकुटा गाँवों के मुखियाओं में विवाद हो गया। उस समय एक अनोखा चमत्कार हुआ। गणपति दादा की मूर्ति स्वतः ही एक गाड़ी में विराजमान हो गई और गाड़ी बिना बैलों के चलने लगी। यह गाड़ी गणपतिपुरा की पहाड़ी पर जाकर खड़ी हो गई और मूर्ति स्वतः ही नीचे उतर आई।
इस घटना के बाद, गणपति दादा की उस स्थान पर स्थापना हुई और तब से इस गाँव का नाम ‘गणपतिपुरा’ पड़ा। यहाँ विराजमान गणेश जी की मूर्ति एकमुखी और स्वतः प्रकट होने के कारण भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गई है।





