
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने ₹76,000 करोड़ के निवेश के साथ SEMICON India प्रोग्राम शुरू किया है। SEMICON India का उद्देश्य है कि वैश्विक उद्योग जगत के नेता, नीति-निर्माता, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाकर निवेश, संवाद और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए।
भारत इस दिशा में एक बड़ा खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। मेक इन इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM), सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम और ISM मिशन जैसी पहलों ने उद्योग के लिए मजबूत इकोसिस्टम बनाया है। वैश्विक सेमीकंडक्टर बाज़ार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का हो जाएगा, और इसमें भारत का बड़ा हिस्सा होगा।
2 से 4 सितंबर तक चलने वाला यह तीन दिवसीय सम्मेलन भारत में एक मजबूत, लचीले और टिकाऊ सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा। यह कार्यक्रम व्यापार और तकनीक से जुड़े नेताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग विश्लेषकों के लिए बहुत रुचिकर होगा। इसमें माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन से जुड़े विभिन्न लोग शामिल होंगे, जैसे – प्रबंधक, उपकरण निर्माता, डिज़ाइन क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, इंजीनियर, कॉलेज/स्नातक छात्र, तकनीशियन और कई अन्य।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) का मकसद है कि सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग और चिप डिज़ाइन में निवेश को वित्तीय मदद दी जाए, ताकि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन से और मज़बूती से जोड़ा जा सके। इसे सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले उद्योग के वैश्विक विशेषज्ञों के नेतृत्व में चलाने की परिकल्पना की गई है। इसका लक्ष्य है भारत में एक मजबूत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम बनाना और भारत को दुनिया का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और डिज़ाइन हब बनाना। ISM इन योजनाओं के कुशल और सुचारु क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है। अभी तक 6 राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें उड़ीसा में पहला सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) फैब और एक एडवांस पैकेजिंग यूनिट भी शामिल है। इन प्रोजेक्ट्स में कुल ₹1.60 लाख करोड़ का निवेश होगा और यह भारत को वैश्विक नेताओं के बराबर खड़ा करेगा।








