जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा – नदियां सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि संस्कृति और संवेदना की धारा हैं, उनका संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है

नई दिल्ली।

जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा  कि “नदियां सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि संस्कृति और संवेदना की धारा हैं”। उन्होंने कहा कि गंगा जैसी महान नदियां हमारी पहचान हैं और उनका संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में छठे नदी उत्सव के आयोजन के दौरान आर सी पाटिल ने कहा कि नदियों पर शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं के तहत काम हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वॉटर विजन@2047 के तहत अथक प्रयास जारी हैं। उद्घाटन समारोह में सी.आर. पाटिल के साथ आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय, इस्कॉन के आध्यात्मिक नेता गौरांग दास, सामाजिक कार्यकर्ता साध्वी विशुद्धानंद और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी मौजूद थे।

तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत ‘रिवरस्केप डायनेमिक्स, चेंजेस एंड कंटिन्युटी’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी से हुई। इसमें 300 से अधिक शोध पत्र आए, जिनमें से 45 प्रस्तुत किए जा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी में नदियों के सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और कलात्मक पहलुओं पर चर्चा हो रही है। साथ ही ‘माई रिवर स्टोरी’ डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल भी आयोजित हुआ, जिसमें गोताखोर: डिसेपेयरिंग डाइविंग कम्यूनिटी, रिवर मैन ऑफ इंडिया, अर्थ गंगा, कावेरी-रिवर ऑफ लाइफ जैसी फिल्में प्रदर्शित की गईं।

नदी उत्सव 27 सितंबर तक चलेगा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और चर्चाएं होंगी। इसका उद्देश्य नदियों, पारिस्थितिकी और संस्कृति के बीच गहरे रिश्तों को मजबूत करना है।

साध्वी विशुद्धानंद ने ईशान्य से कन्याकुमारी तक के अपने अनुभव साझा करते हुए नदियों की पारिस्थितिक विविधता पर ध्यान देने की अपील की।

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