नई दिल्ली।
धोखेबाजों ने वाट्सएप और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश दिखाकर उन्हें एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम देने के लिए मजबूर किया। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय और सीबीआई से जानना चाहा कि लोगों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे पैसे ऐंठने वाले साइबर अपराध गिरोहों का पर्दाफाश करने के लिए पूरे देश में क्या कार्रवाई की आवश्यकता है।
कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से स्तब्ध हैं कि धोखेबाजों ने सुप्रीम कोर्ट और कई अन्य दस्तावेजो के नाम पर जाली न्यायिक आदेश बनाकर लोगों से ठगी करने की हिम्मत की है। पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से इस मामले में साइबर सैल से अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों की जालसाजी और सुप्रीम कोर्ट या (बॉम्बे) हाईकोर्ट के नाम, मुहर और न्यायिक अधिकार का बेशर्मी से आपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है। जजों के जाली हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेशों का निर्माण, कानून के शासन के अलावा, न्यायिक व्यवस्था में जनता के विश्वास की नींव पर भी प्रहार करता है।






