छह बार राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित श्रीनगर के SSP डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने आम नागरिक बनकर पकड़े थे 4 आतंकी डॉक्टर एवं 2921 किलो विस्फोटक

छह बार राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित श्रीनगर के SSP डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने आम नागरिक बनकर 4 आतंकी डॉक्टर एवं 2921 किलो विस्फोटक पकड़े थे जिससे देश में अनेक विस्फोट करने की साजिश को नाकाम किया गया है। लेकिन आतंकी डॉक्टरों ने हड़बड़ी में घबराकर लाल किले के पास एक विस्फोट कर दिया जिसमें कई बेगुनाह लोगों की जान चली गई है।

उन्होंने कुरनूल मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा की पढ़ाई की। 2010 में उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 2014 में वह भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। डॉ. संदीप की जम्मू-कश्मीर में तैनाती रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और उच्च जोखिम वाली भूमिकाओं से परिभाषित थी, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियानों और पुलिस प्रशासन में उनकी विशेषज्ञता को बढ़ाया गया था।

उन्होंने 21 अप्रैल 2025 को उन्होंने इम्तियाज हुसैन मीर के स्थान पर श्रीनगर के एसएसपी का पदभार संभाला। किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए कश्मीर की ये सबसे महत्वपूर्ण पोस्टिंग होती है। अनंतनाग, कुपवाड़ा और कुलगाम के विभिन्न क्षेत्रों में उनके नेतृत्व ने आतंकवादी खतरों को बेअसर किया।

17 अक्टूबर को जम्मू और कश्मीर के अनंतनाग जिले के नौगाम की सड़कों पर उर्दू में पोस्टर लगाए गए थे। इन पर जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य कमांडर हंजला भाई के हस्ताक्षर थे। पहली नजर में ये पोस्टर सामान्य लग रहे थे, लेकिन श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने तुरंत ही पोस्टर में छिपे खतरे को भांप लिया।

छोटी धमकी में भी बड़ा मैसेज छिपा होता है…डॉ जीवी संदीप इसी थ्योरी पर काम करते हैं। उन्होंने छोटी से छोटी धमकी की भी जांच करने की ठान ली। जीवी संदीप ने जैश के पोस्टर्स को लेकर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले। उनमें से तीन ऐसे व्यक्तियों का पता चला, जिन्होंने पहले भी कश्मीर की सड़कों पर पत्थर बरसाए थे। जांच में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले एक नेटवर्क का खुलासा हुआ।

जैश के पोस्टर के बाद मौलवी इरफ़ान अहमद को पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान मौलवी ने जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया। इसी कड़ी में सहारनपुर ओर फरीदाबाद में विस्फोटक प

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