
नई दिल्ली।
भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनका कहना है कि वे अब आदिवासी क्षेत्रों में जाकर समाजसेवा करेंगे। रिटायरमेंट से ठीक पहले आयोजित विदाई समारोह में उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। सीजेआई ने न्यायपालिका से जुड़े मिथकों, सामाजिक न्याय और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत विचार साझा किए।
सीजेआई बीआर गवई ने स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट के बाद वे किसी भी सरकारी पद को स्वीकार नहीं करेंगे। आगे के अपने सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह पहले 10 दिन आराम करेंगे, उसके बाद आगे की योजनाओं पर निर्णय लेंगे। उन्होंने बताया कि समाज सेवा उनके खून में है। विशेष रूप से वे आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक कार्य करने की योजना रखते हैं।
सीजेआई ने एससी-एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य आरक्षण के असल लाभार्थियों तक विशेष सहायता पहुंचाना है। उनके अनुसार इससे उन लोगों को लाभ मिलेगा जिन्हें वास्तव में इसकी सबसे अधिक जरूरत है।
एक सवाल के दौरान जब पूछा गया कि किसी जज के घर पैसे मिलने की स्थिति में सीधे एफआईआर दर्ज होनी चाहिए या सीजेआई द्वारा जांच कराई जानी चाहिए, तो गवई ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।








