
श्रीलंका में ‘दितवाह’ ने भयंकर तबाही मचाई, 135 लोगों की मौत हो गई है और 200 से अधिक लापता बताए जा रहे हैं। इस दैत्य से लड़ने के लिए थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना के हजारों जवान लगाए गए हैं लेकिन स्थिति काबू में नहीं आ रही है। इसने 15,000 से अधिक घरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और लगभग 78,000 से अधिक लोगों को सरकारी अस्थायी आश्रयों में शरण लेनी पड़ी है।
श्रीलंका ने इस संकट में अंतर्राष्ट्रीय सहायता की भी अपील की है। सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि देश के लगभग एक-तिहाई हिस्से में बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई है।
चक्रवाती तूफान ’दितवाह’, श्रीलंका में पिछले एक दशक की सबसे भयानक त्रासदी लेकर आया है। कई इलाके ऐसे भी है जो बाकी देश से पूरी तरह कट चुके हैं और वहां फंसे हुए लोगों की करुण पुकार सरकार तक नहीं पहुंच पा रही हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन में कई बस्तियां पूरी तरह मलबे में दब गईं हैं, जिन्हें निकालने के लिए प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं। इस संकट से निपटने के लिए देश में आपातकाल लागू कर दिया गया है।
सड़क नेटवर्क, पुल, रेल लाइनें और पावर ग्रिड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन्हें दुरुस्त करने के लिए आपातकाल लगाना अनिवार्य हो गया था। भारत ने पड़ोसी देश को राहत का हाथ बढाया है और जहाज द्वारा राहत सामग्री जैसे खाद्य सामग्री, दवाईयां और मेडिकल टीम भी श्रीलंका भेजी है।








