नई दिल्ली।
टीमलीज डिजिटल की रिपोर्ट के अनुसार 2027 तक भारत का एआई बाजार लगभग 17 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। एआई पेशेवरों की संख्या भी करीब 12.5 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वैश्विक एआई टैलेंट का लगभग 16% होगा। इससे स्पष्ट है कि भारत इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती क्षमता और इसका व्यापक उपयोग आने वाले समय में देश की प्रगति को नई दिशा देगा। रिपोर्ट में छह प्रमुख एआई स्किल्स का उल्लेख किया गया है, जिनकी वर्ष 2026 में सबसे अधिक मांग रहने की संभावना है। इनमें सिमुलेशन गवर्नेंस (26-35 लाख रुपए प्रति वर्ष तक वेतन), एजेंट डिजाइन (25-32 लाख रुपए प्रति वर्ष), एआई ऑर्केस्ट्रेशन (24-30 लाख रुपए प्रति वर्ष), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (22-28 लाख रुपए प्रति वर्ष), एलएलएम सेफ्टी एंड ट्यूनिंग (20-26 लाख रुपए प्रति वर्ष) और एआई कंप्लायंस एंड रिस्क ऑपरेशंस (18-24 लाख रुपए प्रति वर्ष) शामिल हैं।
कंपनियां अब एआई को केवल डेटा साइंस तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे नेतृत्व, संचालन, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन जैसे क्षेत्रों में भी लागू कर रही हैं। इसके चलते बड़े पैमाने पर कौशल विकास और मानव-एआई वर्कफ्लो पर जोर दिया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर लगभग 40% नौकरियों पर एआई का प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से आईटी सेवाओं, हेल्थकेयर, बैंकिंग, फाइनेंस और इंश्योरेंस तथा कस्टमर एक्सपीरियंस से जुड़े क्षेत्र इसमें शामिल हैं।





