अंतरराष्ट्रीय आकलनों और राष्ट्रीय वन रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब एशिया के साथ-साथ दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल

नई दिल्ली।

अंतरराष्ट्रीय आकलनों और राष्ट्रीय वन रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब एशिया के साथ-साथ दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है। कार्बन सिंक के रूप में भारत दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल है। वर्ष 2021 से 2025 के दौरान भारत के वन प्रतिवर्ष लगभग 150 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर रहे हैं।

ISFR 2023 के अनुसार, भारत का कुल वन आवरण 21.76 प्रतिशत है, जबकि मैंग्रोव वन लगभग 4,992 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं। रबर बागानों में भारत लगभग 831 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर है और वैश्विक रबर बागानों के कुल 10.9 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

साल 2025 में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने विशेष भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई इस पहल ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव से जोड़ते हुए वृक्षारोपण को व्यक्तिगत कर्तव्य के रूप में स्थापित किया।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नागरिकों, छात्रों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। 2024 में शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 140 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण हो चुके हैं।

वन संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2025–26 के बजट में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लिए 3,412.82 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जो यह दर्शाता है कि भारत की पर्यावरण नीति अब संरक्षण के साथ-साथ सस्टेनेबल उपयोग और क्लाइमेट एक्शन पर केंद्रित है।

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