वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को लेकर बंट गई दुनिया, कुछ अमेरिका के पक्ष में, तो कुछ वेनेज़ुएला के पक्ष में 

वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को लेकर बंट गई दुनिया, कुछ अमेरिका के पक्ष में, तो कुछ वेनेज़ुएला के पक्ष में खड़े हो गए हैं। यहां तक कि ट्रंप की इस कार्यवाही की खुद उनके देश अमेरिका में भी काफी आलोचना हो रही है।

रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर जैसे देशों ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है। इन देशों ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। जबकि, अर्जेंटीना, इजरायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, “मैंने वेनेजुएला में हो रहे डेवलपमेंट पर शुरुआती बदलावों से ही नजर रखी है। इटली ने अपने मुख्य अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर मादुरो की खुद से कही गई चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी, सरकार के दमनकारी कार्यों की निंदा की और हमेशा वेनेजुएला के लोगों की लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीद का समर्थन किया है।”

उन्होंने कहा कि “इटली की पुरानी स्थिति के हिसाब से सरकार का मानना है कि तानाशाही शासन को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य कार्रवाई सही रास्ता नहीं है, लेकिन सरकार अपनी सुरक्षा पर हाइब्रिड हमलों के खिलाफ बचाव के तौर पर दखल को सही मानती है, जैसा कि उन सरकारी संस्थाओं के मामले में होता है जो नशीली दवाओं की तस्करी को बढ़ावा देती हैं और उसका समर्थन करती हैं। हम वेनेजुएला में इटालियन समुदाय की स्थिति पर खास ध्यान दे रहे हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”

ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज ने दोनों पक्षों से बातचीत कर समस्या हल करने की अपील करते हुए कहा कि हम अंतर्राष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करते रहेंगे, जो वेनेजुएला के लोगों की इच्छा को दिखाता है।

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