नई दिल्ली।
अब नॉर्थ ईस्ट भारत लगाएगा अंतरिक्ष में छलांग। सैटेलाइट मिशन के लॉन्च की तैयारी की जा रही है। असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी नॉर्थ ईस्ट भारत की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी है जो इतना महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन शुरू करने जा रही है।
इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2022 में प्रोफेसर बिक्रमजीत काकती के नेतृत्व में की गई थी। मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पांच छात्रों की एक कोर टीम गठित की गई है, जो पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रही है। इसके अलावा लगभग 20 छात्रों के अलग-अलग समूह सैटेलाइट डिजाइन, इंजीनियरिंग, डेटा सिस्टम, कम्युनिकेशन और मिशन प्लानिंग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट छात्रों के लिए अकादमिक ज्ञान को वास्तविक तकनीकी अनुप्रयोग से जोड़ने का एक अनूठा अवसर साबित हो रहा है।
असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी में इंडिजिनस नॉलेज के डायरेक्टर दिनेश बैश्य ने आईएएनएस से बातचीत में इस मिशन को नॉर्थईस्ट भारत के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला मिशन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक मिलकर एक सैटेलाइट लॉन्च करेंगे।
सैटेलाइट का नाम ‘लाचित-1’ महान अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने मुगल सेना के खिलाफ असम की रक्षा की थी। लाचित बोरफुकन साहस, नेतृत्व और स्वदेशी गौरव के प्रतीक माने जाते हैं। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य इन्हीं मूल्यों को युवा इनोवेटर्स में विकसित करना है, ताकि वे तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहें।
लाचित-1 सैटेलाइट को भूस्खलन, बाढ़, मौसम के पैटर्न और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। यह सैटेलाइट नॉर्थईस्ट भारत में आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।





