
नई दिल्ली।
भारत में स्कूल और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में 14.71 लाख विद्यालयों के माध्यम से 24.69 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस विशाल शिक्षा व्यवस्था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत 2030 तक प्री-प्राइमरी से माध्यमिक स्तर तक शत प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप सभी स्कूल स्तरों पर स्थिर प्रगति देखने को मिली है।
वित्त मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 2014-15 में 51,534 थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 70,018 हो गई है। यह वृद्धि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण संभव हुई है। प्रीमियर उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में भी 2014-15 से 2024-25 के बीच महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विद्यार्थियों का नामांकन 2021-22 में 4 करोड़ 33 लाख से बढ़कर 2022-23 में 4 करोड़ 46 लाख हो गया है।
देश में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा जंजीबार और अबूधाबी में आईआईटी के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी शुरू किए गए हैं। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत 2,660 संस्थानों को जोड़ा गया है और 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं।





