
नई दिल्ली।
आज शाम तक मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो सकता है। एन. बीरेन सिंह के साथ-साथ कई बड़े चेहरे मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि राज्य में शांति बहाली और समुदायों के बीच संतुलन बनाने के लिए बीजेपी किसी कुकी विधायक को डिप्टी सीएम का पद सौंप सकती है, ताकि जातीय समीकरणों को साधा जा सके।
मणिपुर में सरकार गठन की यह जल्दबाजी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक भी है। फरवरी 2025 में एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लगे राष्ट्रपति शासन की एक साल की अवधि 12 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। नियमों के मुताबिक, विशेष परिस्थितियों के बिना राष्ट्रपति शासन को एक साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में केंद्र सरकार के पास 12 फरवरी से पहले चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
बीते कुछ महीनों में केंद्र के सीधे हस्तक्षेप और सुरक्षा बलों की तैनाती से मणिपुर में हिंसा की घटनाओं में भारी कमी आई है। भाजपा आलाकमान का मानना है कि अब राज्य एक स्थिर सरकार के लिए तैयार है। दिसंबर में बी.एल. संतोष और संबित पात्रा के इम्फाल दौरे के बाद से ही जमीनी स्तर पर विधायकों को एकजुट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बड़ी संख्या में विधायक पहले ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अधिकारीमयूम शारदा देवी भी विधायकों के साथ मौजूद हैं।





