
दुबई में लोगों से इनकम टैक्स नहीं लिया जाता, फिर भी उसका इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी खजाना दुनिया के सबसे मजबूत देशों में से एक है। जबकि अधिकांश देशों में लोगों से उनके उनकी कमाई पर भरपूर टैक्स लिया जाता है और सरकारी खजाना भरा जाता है। अब यह सोचना तो लाजमी है कि बिना टैक्स वसूले भी दुबई इतना लग्जरी कैसे बना हुआ है?
दुनिया भर में दुबई अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और टैक्स-फ्री सैलरी के लिए जाना जाता है। आम तौर पर किसी भी देश की सरकार अपनी जनता से वसूले गए इनकम टैक्स (Income Tax) से चलती है लेकिन दुबई में यह नियम लागू नहीं होता। इसके बावजूद दुबई का इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी खजाना दुनिया के सबसे मजबूत देशों में से एक है।
अब सवाल आता है कि जब इनकम टैक्स नहीं लिया जाता है तो सरकार विकास कार्य कैसे करती है ? और वो ऐसा कि जिसका दुनिया भर में नाम है। दुबई सरकार जनता से सीधा टैक्स लेने के बजाय सर्विस फीस पर फोकस करती है। दुबई में रहने वाले लाखों प्रवासियों को वीजा, रेजिडेंसी परमिट और वर्क ऑथराइजेशन के लिए सरकार भारी फीस चुकानी वसूलती है।
इसके आलावा दुबई में नया व्यापार शुरू करने या पुराने को रिन्यू करने के लिए सरकार को मोटी रकम दी जाती है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गुजरने वाला हर यात्री डिपार्चर और सर्विस चार्ज देता है जिससे सरकार को अरबों की कमाई होती है। होटलों में रुकने, रेस्तरां में खाना खाने और मनोरंजन गतिविधियों पर सरकार टूरिज्म लेवी वसूलती है।

दुबई में बुर्ज खलीफा जैसी प्रतिष्ठित इमारतों और बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के जरिए सरकार लीजिंग और निवेश से मोटी कमाई करती है। दुनिया की सबसे बड़ी और सफल एयरलाइंस में से एक एमिरात एयरलाइंस है, जिसका पूरा मुनाफा सरकार के पास जाता है। इसके साथ ही दुबई सरकार खुद कई विश्व स्तरीय कंपनियों की मालिक है जो सीधे लाभ कमाकर सरकारी खजाने को सुदृढ़ बनाती हैं।








