
नई दिल्ली।
मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों पर भारी दबाव पड रहा है जिससे लोगों की कम उम्र में ही नजर कमजोर हो रही है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की लगभग 30% आबादी किसी न किसी प्रकार के दृष्टि दोष से प्रभावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर का बोझ काफी बड़ा है। अनुमान है कि राजधानी की लगभग 29.5% आबादी, यानी करीब 60 लाख लोग अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर या प्रेसबायोपिया से प्रभावित हैं। 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में इसका प्रचलन सबसे ज्यादा पाया गया है, जहां करीब 70% लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) तेजी से बढ़ रहा है। नई दिल्ली में बच्चों में मायोपिया की दर 13.1% दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में दूर की दृष्टि के लिए प्रभावी रिफ्रैक्टिव एरर कवरेज 59.8% और पास की दृष्टि के लिए 47.1% आंका गया। हालांकि इसमें लैंगिक असमानता भी देखने को मिली है, जहां महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम कवरेज मिल पा रहा है।
दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (एम्स) के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थल्मिक साइंसेज़ के कम्युनिटी ऑप्थल्मोलॉजी विभाग ने नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रिफ्रैक्टिव एरर सिचुएशन एनालिसिस टूल (RESAT) पर आधारित रिपोर्ट जमा की है। इस रिपोर्ट में राजधानी में आंखों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं, चुनौतियों और जरूरतों का विस्तृत आकलन किया गया है।







