50 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है “20 मार्च – विश्व गौरैया दिवस”

नई दिल्ली।

दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है “20 मार्च – विश्व गौरैया दिवस”। विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत साल 2010 में पक्षी संरक्षण संगठन ‘नेचर फॉरएवर’ द्वारा की गई थी। अब यह 50 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य गौरैया की तेजी से घटती संख्या के बारे में लोगों को बताना और उनके संरक्षण के लिए कदम उठाना है।

गौरैया दिखने में छोटी लेकिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये इकोसिस्टम के लिए बेहद आवश्यक हैं। ये कीड़े-मकोड़ों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित रखती हैं, जिससे फसलों और पर्यावरण को फायदा होता है। साथ ही परागण और बीज फैलाने में भी मदद करती हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर जैव विविधता बनाए रखने में इनकी बड़ी भूमिका है।

गांवों की शांत सुबह से लेकर शहरों की चहल-पहल तक, छोटी-छोटी गौरैया की मधुर चहचहाहट कभी हर जगह गूंजती थी। ये नन्हीं चिड़िया बिना बुलाए ही घरों के आंगन और छत पर आ जाती थी, और उनके झुंड यादगार पल बनाते थे, लेकिन आज ये हमारे आसपास से लगभग गायब हो चुकी हैं। कई इलाकों में गौरैया अब दुर्लभ हो गई हैं।

गौरैया की संख्या चिंताजनक तरीके से घट रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे शहरीकरण, आधुनिक इमारतों में घोंसला बनाने की जगह नहीं मिलती, और पुरानी दीवारों और छतों की जगह कंक्रीट आ गया। मोबाइल टावरों से निकलने वाली अल्ट्रा वॉयलेट तरंगे भी इनके लिए घातक सिद्ध हो रही हैं। इनके अलावा प्रदूषण, सीसा रहित पेट्रोल से निकलने वाले विषैले पदार्थ उन कीड़ों को मार देते हैं, जिन पर गौरैया भोजन के लिए निर्भर हैं।

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