
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सरकार को दिया सुझाव – “सरकारी आयुध फैक्ट्रियों में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए, तो इनका प्रोडक्शन 10 गुना हो जाएगा। जीडीपी तेजी से बढ़ेगी, हथियारों का निर्यात बढ़ेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।”
उन्होंने कहा कि इससे भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा और साथ ही निर्यात भी करने लगेगा जिससे भारत की गिनती दुनिया के उन चुनिंदा देशों में होगी जो रक्षा संबंधी उपकरण, हथियार निर्यात करते हैं।
वेदांता चेयरमैन ने जोर देकर कहा कि इन फैक्ट्रियों का निजीकरण ‘एयर इंडिया’ की तर्ज पर बिल्कुल स्मूथ तरीके से होना चाहिए। समय बहुत कीमती है और हमें जमीन, हवा और पानी तीनों मोर्चों पर स्वदेशी हथियारों की जरूरत है।
हमारे राजा-महाराजा भले ही शांतिप्रिय थे, लेकिन उनकी ताकत का असली आधार उनकी तलवारें, घोड़े और तोपें ही थीं। आज भी वही सिद्धांत लागू होता है। भारत के पास 41 ऐसी आयुध फैक्ट्रियां हैं, जो हथियार और गोला-बारूद बनाती हैं। यदि इनमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी जुड जाए तो इनका उत्पादन 10 गुना तक बढ़ सकता है जो देश की जीडीपी को रफ्तार देगी।”





