
फिरोजाबाद।
सामाजिक संस्था बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के तत्वावधान में हज 2026 के लिये जाने वाले आज़मीन-ए-हज पुरुष और महिलाओं को दी गई ट्रेनिंग
साहित्यिक व सामाजिक संस्था बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के तत्वावधान में हज 2026 के लिये जाने वाले आज़मीन-ए-हज पुरुष और महिलाओं को हज में किये जाने वाले कार्यों की जानकारी देने के लिये हज ट्रेनिंग कैम्प का आयोजन 05-04-2026 सुबह 9 बजे से 3 बजे तक मस्जिद आयशा मोमिन नगर लालपुर मण्डी पर किया गया, जिसमें हज से संबंधित कई जानकारियां दी गईं ।
साहित्यिक व सामाजिक संस्था बज़्मे फरोग़े अदब के अध्यक्ष हाजी असलमअदीब ने जायरीन को हज, उमराह, तवाफ और सई करने के तरीके को विस्तार से समझाते हुए बताया कि
हज सऊदी अरब के मक्का शहर में इस्लामिक कलेंण्डर के अंतिम माह जिलहिज्जा की आठवीं तारीख़ से शुरु होता है और 12 तारीख़ तक पूर्ण होता है।
मक्का शहर के पास मिना के मैदान में 8 तारीख़ को हज पर आने वाले सभी जायरीन को कैंप में लगे ख़ैमौं में ठहराया जाता है। 9 तारीख़ को अरफ़ात के मैदान में दोपहर से सूरज छुपने तक ठहरना होता है। रात को मुज़दलिफा में ठहरना होता है । हज की रस्में चांद की 12 तारीख तक चलती है। हज के इन पांच दिनों में सभी हाजी अल्लाह से ख़ूब दुआ मांगते हैं।अपने गुनाहों से तौबा करते हैं अल्लाह से माफ़ी मांगते हैं।अपनी जिंदगी की खुशहाली और अपने देश में अमन -चैन के लिये दुआ करते है। तीसरे दिन काबा की परिक्रमा करते हैं । चौथे और पांचवें दिन जमरात पर कंकरियां मारकर हज की रस्में पूरी करते हैं। हज में तीन फ़र्ज़ और छ: वाजिब अदा किये जाते हैं। हमारे नबी रसूलल्लाहि स०अ०व० का इरशाद कि जिस मुसलमान पर हज फ़र्ज़ हो जाये तो जल्दी हज करो, देर मत करो।हज करने के बाद हाजी गुनाहों से पाक साफ हो जाता है।
हज कमैटी उत्तर प्रदेश के हज ट्रेनर और शहर के मशहूर आलिम मौलाना आलम मुस्तफा याक़ूबी साहब ने हाजियों को सब्र और तसल्ली से काम लेकर हज की रस्मों की सही आदायगी करने की जानकारी दी। और सऊदी अरब सरकार ने
हज के लिये क्या-क्या क़ानून बनाये हैं । नई गाइड लाइन क्या आईं हैं की जानकारी दी। मुफ्ती मोहम्मद शुऐव साहब ने जायरीने हज के हक़ में दुआ कराई।
सामाजिक संस्था चिराग सोसायटी के डायरेक्टर डा० ज़फ़र आलम साहब ने आज़मीन-ए-हज का स्वागत किया और मिठाई खिला कर ख़ुशी का इज़हार किया। हज गाइड बुक, तस्वीह, आदि सामान सप्रेम भेंट किया।
हाजी राहत अली खान एडवोकेट ने आज़मीन-ए-हज को उमराह और खाना काबा के तवाफ की बिस्तार से जानकारी दी।और हज के सफर में आने वाली कठिनाईयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिससे हज के सफर में आसानी होगी।
ट्रेनिंग का आयोजन सफल रहा। हज पर जाने वालौं में अजहरुद्दीन,वकील अहमद,मो० हसीन,मो०सिजिद,मो० नईम,हबीब, शकील अहमद, रियाजउद्दीन,नूरनवी,कमाल उद्दीन,शराफत,मो० उस्मान,रहीशुद्दीन, कफील अहमद साबिर अली,अंसारी,शमशाद,क़मर,सरफराज़ अहमद,आदि रहे।
महिलाओं में शाज़िया, संजीदा, कहकशां, तस्लीम, शाहीन, शबाना, सामिया, बिलकीस, रुकसाना, अस्मा बेगम, सायरा बेगम, अमीना, शाइस्ता, साइमानाज़ सायरा, अरशी, नाज़मीन आदि उपस्थित रहीं।
आज़मीन-ए-हज की ख़िदमत करने में हाजी अनवर अंसारी,हाजी मुसद्दक हुसैन, हाजी राहत अली खान, डा०जफर आलम, नौशाद भाई, हाजी सगीर भाई, शाकिर भाई, मौहम्मद शमीम, हाजी खलील,मो० नौशाद भाई, फिरोज़ भाई, मंज़र नवाब, उस्ताद ज़ीरो बांदवी, हाजी ऐजाज़, हाजी नईम परवेज़, हाजी क़ासिम अली, हाजी मुनीर रंगरेज, चीनी बाबू, आदि की उपस्थित सराहनीय रही।





