
नई दिल्ली।
भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट के पार पहुंच गई है। पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अहम भूमिका रही है। इन राज्यों में पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह उपलब्धि वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में लगभग 46% अधिक है। यह वृद्धि देश में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार और तैनाती को दर्शाती है।
सरकार ने पवन ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें टरबाइन निर्माण से जुड़े कच्चे माल पर रियायती सीमा शुल्क, जून 2028 तक अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली शुल्क में छूट, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रणाली और नवीकरणीय ऊर्जा खपत दायित्व जैसे उपाय शामिल हैं।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। पवन ऊर्जा में यह रिकॉर्ड वृद्धि इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





