
अमेरिका 30 देशों के सोने के भंडार की रखवाली करता है, लेकिन अब कई देश अपना सोना अमेरिका से वापस निकाल रहे हैं। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देश जर्मनी का करीब 37 फीसदी या 1236 टन सोना अमेरिका के तहखाने में रखा है, जिसकी वैल्यू 128 अरब डॉलर से अधिक है। जर्मनी के अलावा इटली का 1060 टन, नीदरलैंड्स का 190 टन सोना अमेरिका की तिजोरी में रखा है। फ्रांस, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, लेबनान यहां तक कि आईएमएफ जैसे संगठनों ने भी अपना सोना अमेरिका के तहखाने में जमा करके रखा है।
भारत ने भी अपने गोल्ड रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटेन की तिजोरी में रखा है। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास 880.8 मीट्रिक टन सोना है, जिसमें से 575.8 टन सोना भारत में ही रखा है, जबकि करीब 290.3 मीट्रिक टन सोना विदेशों में जमा हैं।
यूरोपीय देश अब अमेरिका से अपना सोना वापस निकालना चाहता है। ट्रंप के फैसलों ने यूरोप का भरोसा हिला दिया है। जिस अमेरिका को दशकों तक यूरोप ने सुरक्षा कवच माना और अपना रणनीतिक गारंटर माना। अब वो उसके खिलाफ है। ग्रीनलैंड पर ट्रंप की लालच ने यूरोप और अमेरिका की दूरी बढ़ा दी है। ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति के साथ-साथ ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडा ने दोनों के बीच के भरोसे को कम कर दिया है। ट्रंप के आने के बाद से यूरोपीय देश अमेरिका पर भरोसा खो रहे हैं। यही वजह है कि अब जर्मनी समेत यूरोपीय देश अमेरिका के तहखाने में रखा अपना सोना वापस चाहते हैं।





