
फिरोजाबाद।
इकरा कान्वेंट स्कूल के स्थापना दिवस (फाउण्डेशन डे) के मौके पर ओसियन गार्डन में साहित्यिक व सामाजिक संस्था बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के तत्वावधान साहित्यिक मुशायरा आयोजित किया गया।
मुशायरा का उदघाटन स्कूल डायरैक्टर मैराज अब्बास के साथ समाज सेवी सरबर हुसैन साहब ने किया। मुशायरे की अध्यक्षता डा० ज़फ़र आलम डाइरेक्टर चिराग़ सोसायटी ने की।
मुशायरा मशहूर शायर कलीम नूरी की नात से आरम्भ हुआ।
“जब भी नामे रसूल आया है
आंधियों ने भी सर झुकाया है”
मशहूर शायर अख़्तर देहलवी ने ग़ज़ल यूं पढ़
“” सर आंखों पे तेरी क़सम ले लिया है
ख़ुशी जान कर तेरा ग़म ले लिया है””
अमजद रज़ा के ये शेर खूब पसंद किये गये…
नफ़ा नुक़सान की किसको पड़ी है
यहां ईमान की किसको पड़ी है “”
” तिजोरी भर रहे हैं अपनी अपनी
गरीब इंसान की किसको पड़ी है”
उमर पैकर फिरोजाबादी ने शेर यूं पढ़ा….
मेरे पहलू में बैठे हैं वो बे सबब मुस्कराने लगे
जाने क्या हो गया है मुझे ख्वाब दिन में ही आने लगे”
मशहूर शायर कलीम नूरी फ़ीरोज़ाबादी ने की ग़ज़लें,गीत
पढ़ें। उनका ये कलाम ख़ूब पसंद किया गया।
मिल जुल के दिये इल्म के हर सम्त जलाऐं
आओ कि जहालत के अंधेरौं को मिटाऐं
बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के अध्यक्ष असलम अदीब फीरोज़बादी ने इकरा स्कूल के लिये यूँ कहा।
” मंजिलों का पता बताते हैं
इल्म की रौशनी लुटाते हैं
इनके कल को संवारने के लिए
अपने बच्चों को हम पढा़ते है”
हाफ़िज़ अरशद रज़ावी साहब ने फ़रमाया
चाहे जितना भी तुम सजो सँवरो,
झुर्रियाँ रुख पे आ ही जाती हैं
गर्दिशें रात-दिन की ऐ अरशद,
उम्र इंसाँ को खा ही जाती
सीनियर शायर ज़फर फिरोजाबादी ने कहा
मेरी किताब में तेरा हिसाब बाक़ी है ”
अन्य शायरौ ने भी कलाम पढ़े।
अंत में मुशायरा के अध्यक्ष डॉक्टर ज़फ़र आलम ने मुशायरा के लिए इकरा कान्वेंट स्कूल स्टाफ और असलम अदीब को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में क़ाज़ी अरशद साहब, सरबर साहब, साहिल खान, आसिफ अली, सिमरन मैम,सुमैय्या मैम,रुचि मैम,मानसी मैम,महाम मैम,आकांक्षा जी,अनमता मैम, शबनम मैम,मीना जी,अलशिफा जी,अंजुम मैम,मंताशा जी,शिफा मैम,शमा मैम और स्कूल प्रधानाचार्य श्री रवि कुशवाहा जी की उपस्थिति सराहनीय रही।





