
*सनातन संस्कृति की रक्षा और गौ सेवा के लिए संकल्पित हों श्रद्धालु: स्वामी कैलाशानंद गिरि*
*श्रीराम कथा का भव्य विश्राम: सनातन संस्कृति की रक्षा और गौ सेवा का लिया गया संकल्प*
*श्रीराम कथा के सप्तम सोपान पर गूंजा नवधा भक्ति का संदेश, सनातन संस्कृति और गौ रक्षा का लिया गया संकल्प*
*फरह स्थित दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र (गौ ग्राम) में आयोजित कथा का भव्य विश्राम; स्वामी कैलाशानंद जी ने सुनाया राम-शबरी प्रसंग, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री व संघ पदाधिकारी हुए शामिल*
फरह (मथुरा),
दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, गौ ग्राम (फरह) के प्रांगण में दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य श्रीराम कथा का गुरुवार को सातवें दिन (सप्तम सोपान) पूर्ण श्रद्धा और जयघोष के साथ विश्राम हुआ।
व्यासपीठ पर विराजमान पूज्यपाद निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के श्रीमुख से कथा का रसपान करने के लिए दूर-दराज से लाखों श्रद्धालु ट्रैक्टर, बसों और पैदल यात्रा कर कथा पंडाल में पहुंचे। इस पावन अवसर पर वक्ताओं ने सनातन धर्म, गौ सेवा और भगवान के आदर्शों पर अत्यंत ओजस्वी विचार व्यक्त किए।
*शबरी के जूठे बेर और नवधा भक्ति का मार्मिक प्रसंग*
व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने भगवान श्रीराम की महिमा और माता शबरी की भक्ति का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाया। महाराज श्री ने कहा, “भगवान राम दया के सागर और परम भक्त वत्सल हैं। वनवास के दौरान जब प्रभु राम माता शबरी के आश्रम पहुंचे, तो उन्होंने शबरी के जूठे बेर प्रेम से खाकर यह सिद्ध कर दिया कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं।” उन्होंने कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि प्रभु राम ने माता शबरी को ‘नवधा भक्ति’ (भक्ति के नौ प्रकार) का उपदेश दिया, जिसमें *’प्रथम भगति संतन्ह कर संगा’* से लेकर प्रभु पर अटूट विश्वास तक का वर्णन है। स्वामी जी ने कहा कि जो जीव नवधा भक्ति में से किसी एक को भी अपने जीवन में अपना लेता है, उसे भगवान सहज ही प्राप्त हो जाते हैं। कथा के विश्राम पर भक्तों के बिछड़ने के भाव को उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई *”मिलत एक दारुन दुख देही”* के माध्यम से व्यक्त किया।
*पाश्चात्य कुचक्र से रहें सावधान, गौ रक्षा है सर्वोपरि : वेदपाठी पवन दत्त मिश्र जी*
कथा प्रारंभ होने से पूर्व मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
*सनातन संस्कृति बनाम पाश्चात्य कुचक्र:*
कथा के दौरान मंच संचालन करते हुए वेदपाठी पवन दत्त मिश्र जी ने सनातन संस्कृति की महानता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारी सनातन संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ परंपरा है, जहाँ भगवान को 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं, जबकि पाश्चात्य संस्कृति केवल उपभोग करना सिखाती है।” वक्ताओं ने आगाह किया कि कुछ दुराचारी शक्तियां सनातन संस्कृति को नष्ट करने का कुचक्र रच रही हैं, जिससे हमें जागृत होकर निपटना होगा।
*मत्स्य अवतार और जल संरक्षण का संदेश:*
भगवान के 24 अवतारों का वैज्ञानिक रहस्य समझाते हुए बताया गया कि भगवान श्री हरि ने सबसे पहले ‘मत्स्य अवतार’ (मछली का रूप) लिया, जो यह स्पष्ट संदेश देता है कि जल के बिना सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं है। इसके बाद ‘कच्छप अवतार’ जल और थल दोनों के संतुलन का प्रतीक है।
इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों की दृढ़ इच्छाशक्ति की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।
*संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों का कठोर संकल्प:*
गौ सेवा के प्रति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं के समर्पण की मंच से भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। संघ के कई स्वयंसेवकों ने यह कठोर संकल्प लिया है कि जब तक सड़कों पर गौ माता सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक वे ठीक से अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और न ही सिले हुए वस्त्र धारण करेंगे। यह राष्ट्र और संस्कृति के प्रति उनके असीम त्याग को दर्शाता है।
*श्रीराम की मर्यादा और श्रीकृष्ण का धर्म रक्षण:*
भगवान के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा गया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने माता-पिता की आज्ञा मानकर राजतिलक छोड़ 14 वर्ष का वनवास चुना और मर्यादा की स्थापना की। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण ने जेल में जन्म लेकर कंस और पूतना जैसे आतातायियों का वध कर धर्म की रक्षा की।
*ब्रज भूमि पर कथा श्रवण परम सौभाग्य: ब्रजेश पाठक*
कार्यक्रम में विशेष रूप से पधारे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने परम उपासक डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के चरणों में वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मथुरा की इस पावन धरती पर भव्य श्रीराम कथा का श्रवण करना हम सभी के लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने गौ ग्राम में चल रहे गौ सेवा के पुनीत कार्यों और क्षेत्र के समग्र विकास की सराहना करते हुए इसका श्रेय आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी के कुशल मार्गदर्शन को दिया।
*इन विशिष्ट अतिथियों ने की सहभागिता*
इस धर्म महाकुंभ में कई गणमान्य लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख रूप से उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ विधायक मदन कौशिक, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और बाह (आगरा) की विधायक रानी पक्षालिका सिंह उपस्थित रहीं।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय ग्राम विकास प्रमुख डॉ. दिनेश जी, क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी, अखिल भारतीय गौ गतिविधि संयोजक अजीत महापात्र जी, क्षेत्र कार्यवाह प्रमोद शर्मा और प्रांत प्रचार प्रमुख, ब्रज कीर्ति कुमार ने भी सहभागिता की। शिक्षाविदों और समाजसेवियों में परम पूज्य श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी महाराज के कृपा पात्र विनीत त्रिपाठी, पंछी पेठा (आगरा) की रजनी गोयल, केडी यूनिवर्सिटी के मनोज अग्रवाल, श्री बालाजी पब्लिकेशन (मुजफ्फरनगर) के प्रभात कुमार, मेरठ से मनिका शर्मा और बिजनौर से अमित गोयल सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





