खुशहाल परिवार दिवस पर नव दंपति और उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं पर रहेगा फोकस

– जनपद के सभी शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों पर खुशहाल परिवार दिवस आयोजित होगा

आगरा,
परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत समुदाय में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता लाने तथा इसकी स्वीकार्यता बढ़ाने के उद्देश्य से जनपद में प्रत्येक माह की 21 तारीख को ‘खुशहाल परिवार दिवस’ मनाया जाता है। जनपद के सभी शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों पर खुशहाल परिवार दिवस का आयोजन स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाएगा। साथ ही खुशहाल परिवार दिवस के दौरान लक्षित दंपत्तियों को परिवार नियोजन संबंधी सेवाएं एवं परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि खुशहाल परिवार दिवस के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न अस्थाई साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें परिवार नियोजन के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि समुदाय स्तर पर परिवार नियोजन की स्वीकार्यता बढ़ाना इसका मुख्य उद्देश्य है, ताकि परिवार खुशहाल रहें और मां-बच्चे दोनों स्वस्थ रहें।

परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद यादव ने बताया कि खुशहाल परिवार दिवस पर ऐसी महिलाएं जिनका प्रसव विगत एक वर्ष में हुआ है और वह उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली (एचआरपी) की श्रेणी में रही हैं, नव विवाहित दम्पति जिनका विवाह विगत एक वर्ष में हुआ हो ,योग्य दंपत्ति जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे हों, ऐसे लोगों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के बारे में जागरूक किया जाएगा। खुशहाल परिवार दिवस का उद्देश्य परिवार नियोजन को बढ़ावा देना और मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाना है।

डीपीएम कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि खुशहाल परिवार दिवस पर परिवार नियोजन के बास्केट ऑफ च्वॉइस, स्थायी व अस्थायी साधनों की जानकारी, भ्रांतियों को दूर करने, सेवाओं की उपलब्धता ,स्वीकार्यता ,प्रोत्साहन राशि की जानकारी भी दी जाएगी।

खुशहाल परिवार दिवस पर खास फोकस रहेगा
– हाल में प्रसव वाली उच्च जोखिम गर्भवती महिलाएं (एचआरपी): विगत एक वर्ष में जिनका प्रसव हुआ है।
– नव विवाहित दम्पति: जिनका विवाह विगत एक वर्ष में हुआ है।
– तीन या अधिक बच्चे वाले दम्पत्ति: योग्य दंपत्ति जिनके तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं।
खुशहाल परिवार दिवस का मुख्य उद्देश्य:
– परिवार नियोजन को बढ़ावा देना।
– मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाना।

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