
नई दिल्ली।
इंडिया मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर बनेगा हार्मुज कॉरिडोर का विकल्प, इससे भारत, खाड़ी देश, इजराइल और यूरोप आपस में जुड़ेंगे और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक आसान, तेज और सस्ता विकल्प बनेगा। साथ ही ईरान के प्रभुत्व वाले हार्मुज कॉरिडोर पर निर्भरता भी बहुत कम हो जाएगी।
यह दो मुख्य गलियारों से मिलकर बना है- पूर्वी गलियारा जो भारत को खाड़ी से जोड़ने वाला है, और दूसरा उत्तरी गलियारा जो खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाला है।
इसका प्रमुख मार्ग कुछ इस प्रकार से होगा – भारत में गुजरात का मुंद्रा पोर्ट और कांडला पोर्ट, मुम्बई का जवाहरलाल नेहरू पोर्ट — यूएई (रेल मार्ग) — सऊदी अरब (रेल मार्ग) — जॉर्डन (रेल मार्ग) — इज़राइल (हाइफ़ा पोर्ट) — यूरोप
यह मार्ग सदस्य देशों के बीच व्यापार, क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और रोजगार पैदा करने में मदद करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य (ईरान के प्रभाव क्षेत्र) को दरकिनार करते हुए एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। अब इजराइल इस गलियारे को तेज करने के लिए सक्रिय है ताकि होर्मुज स्ट्रेट के प्रभाव को कम किया जा सके।
इस कॉरिडोर में समुद्री रास्ते और रेल मार्ग दोनों शामिल हैं। यह भारत के पश्चिमी तट से यूएई तक समुद्री मार्ग, फिर सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल के माध्यम से रेल मार्ग और अंत में इजरायल से यूरोप तक फिर से समुद्री मार्ग का उपयोग करेगा। इस कॉरिडोर प्रोजेक्ट में भारत, अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
यह सिर्फ एक माल परिवहन मार्ग नहीं होगा बल्कि इसमें बिजली के केबल, हाइड्रोजन पाइपलाइन और हाई-स्पीड डेटा केबल बिछाने की भी योजना है। इससे वर्तमान समुद्री मार्गों (जैसे स्वेज नहर) की तुलना में समय को लगभग 40% तक कम करने और परिवहन लागत को कम करने में बहुत मदद मिलेगी।
इन सभी खूबियों के साथ साथ इसे चीन के बिल्ड एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।





