आज 16 मई को 21वां विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया जा रहा है, अकेले भारत में ही हर वर्ष लगभग 11 लाख लोग उच्च रक्तचाप से जान गवांते हैं

नई दिल्ली।

उच्च रक्तचाप आधुनिक समय की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है। चिंताजनक तथ्य यह है कि भारत में हर वर्ष लगभग 11 लाख लोग केवल इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं, क्योंकि उनकी धमनियों में रक्तचाप खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है।‘साइलेंट किलर’ कहलाने वाला उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे शरीर को भीतर से नुकसान पहुंचाता है और हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी फेलियर जैसी कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। ऐसे में यह दिवस केवल जागरूकता का अवसर नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति समाज को सचेत करने का महत्वपूर्ण संदेश भी है।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर साल 17 मई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसे पहली बार इसी तारीख को साल 2006 में ‘वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग’ (डब्ल्यूएचएल ) द्वारा स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को ‘साइलेंट किलर’ माने जाने वाले उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के खतरों और बचाव के प्रति जागरूक करना है।

डॉक्टर इसे ‘साइलेंट किलर’ (मूक हत्यारा) कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अगर आपका ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 एमएमएचजी या उससे ऊपर रहता है, तो आप इसके शिकार हो चुके हैं। इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरुआत में इसके कोई लक्षण (जैसे सिरदर्द या चक्कर आना) ही दिखाई नहीं देते।

शायद यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ के 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हाई बीपी से जूझ रहे करीब 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्कों में से लगभग 44 प्रतिशत (करीब 60 करोड़ लोग) इस बात से पूरी तरह अनजान रहते हैं। जब तक वे इसके बारे में जानते, तब तक हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी नौबत आ चुकी होती है।

SHARE