राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस 21 मई, आतंकवाद और हिंसा के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक एकता, शांति और मानवीय मूल्यों के संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प

‘आतंकवाद’ शब्द का मूल अर्थ भय या आतंक उत्पन्न करना है। सामान्यतः यह किसी राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक अथवा वैचारिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए हिंसा और भय का योजनाबद्ध प्रयोग है। इसका लक्ष्य केवल जनहानि नहीं, बल्कि समाज की मानसिक संरचना और राष्ट्रीय स्थिरता को प्रभावित करना भी होता है।

आतंकवाद विरोधी दिवस के प्रमुख उद्देश्य हैं: आतंकवाद और हिंसा के प्रति समाज को जागरूक बनाना। युवाओं को कट्टरवाद और उग्रवादी विचारधाराओं से दूर रखना। राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना। लोकतांत्रिक मूल्यों तथा शांति के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना। आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना

भारत में राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस प्रतिवर्ष 21 मई को मनाया जाता है। इस दिन वर्ष 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी। यह घटना केवल एक राजनीतिक हत्या नहीं थी, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती भी थी। इस घटना के बाद भारत सरकार ने आतंकवाद के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा समाज में शांति और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया।

आतंकवाद किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, बल्कि अनेक सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और वैचारिक कारकों का संयुक्त प्रभाव है। इसके प्रमुख कारण हैं: राजनीतिक अस्थिरता और छद्म युद्ध। धार्मिक कट्टरता एवं वैचारिक उग्रवाद। आर्थिक असमानता और बेरोजगारी। सामाजिक उपेक्षा और असंतोष। विदेशी हस्तक्षेप। तकनीक और सोशल मीडिया का दुरुपयोग। युवाओं का कट्टरपंथीकरण। इन परिस्थितियों में उत्पन्न असंतोष और भ्रमित विचारधाराएं कई बार हिंसक गतिविधियों का आधार बन जाती हैं।

आज आतंकवाद वैश्विक समस्या बन चुका है। आधुनिक तकनीक ने आतंकवादी संगठनों को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित करने में सहायता प्रदान की है। आतंकवादी संगठन: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क का उपयोग करते हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित प्रचार करते हैं। सीमाओं के पार से संचालन करते हैं। डिजिटल माध्यमों से कट्टर विचारधाराओं का प्रसार करते हैं। आतंकवाद का प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता; यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, मानवाधिकार, पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय संबंध और सामाजिक स्थिरता को भी प्रभावित करता है।

 

SHARE