महाराष्ट्र में इलेक्ट्रिक बोट निर्माण परियोजना शुरू करने की तैयारी, मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज के बीच एमओयू , 150 करोड़ का होगा निवेश

महाराष्ट्र में इलेक्ट्रिक बोट निर्माण परियोजना शुरू करने की तैयारी हो गई है। इस संबंध में मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किये गए हैं। यह समझौता मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए आधुनिक नौकाओं की उपलब्धता और सिंधुदुर्ग जिले में शिपबिल्डिंग सुविधाओं के विकास को लेकर किया गया है।

एमओयू पर हस्ताक्षर के दौरान राज्य के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री और सिंधुदुर्ग के संरक्षक मंत्री नितेश राणे मौजूद रहे। बैठक में दोनों परियोजनाओं को जल्द लागू करने और उनके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य महाराष्ट्र में समुद्री परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीक आधारित बनाना है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार महाराष्ट्र के समुद्री क्षेत्र में बड़े निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। उनका कहना है कि मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना और सिंधुदुर्ग में इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई जैसी पहलें राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई गति देंगी। इससे आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और समुद्री परिवहन अधिक सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल बनेगा।

मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक नौकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी तालुका स्थित तलवणे गांव में लगभग 22 एकड़ भूमि पर 150 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी।

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