26 जुलाई रविवार का “दिन पूरे 24 घंटे का नहीं होगा”, वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय

नई दिली।

26 जुलाई रविवार का “दिन पूरे 24 घंटे का नहीं होगा”, वैज्ञानिकों के लिए चिंता का यह विषय है। रविवार, 26 जुलाई का दिन भी सामान्य दिनों से अलग है। आज भले ही आपकी घड़ी टिक-टिक करके 24 घंटे ही दिखाएगी, लेकिन असल में आज पृथ्वी सामान्य से 0.65 मिलीसेकंड तेजी से अपना चक्कर पूरा कर लेगी। वैज्ञानिकों के लिए यह नन्हा सा टाइम गैप चिंता का कारण बन गया है।

यह बदलाव इतना छोटा है कि आम इंसान को इसका अहसास तक नहीं होगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दिन मानक 24 घंटे यानी 86,400 सेकेंड से मात्र 0.65 मिलीसेकंड छोटा रहेगा। पलक झपकाने से भी कम समय के इस फेरबदल से इंसानी जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन समय के इस छोटे आंकड़े के पीछे एक बड़ा सच छिपा हुआ है। धरती की घूमने की रफ्तार में ऐसा बदलाव आ रहा है, जो पिछले 36 लाख सालों में नहीं देखा गया और इसकी सबसे बड़ी वजह क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वियना और ETH ज्यूरिख के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिसर्च के मुताबाकि, जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के दिन प्रति सदी 1.33 मिलीसेकंड की दर से लंबे हो रहे हैं। प्राचीन जीवाश्मों और एडवांस्ड मशीन लर्निंग की सहायता से रिसर्चर्स ने पाया कि दिन लंबे होने की यह रफ्तार बीते 36 लाख सालों में सबसे तेज है।

आम आदमी पर इस नन्हें से बदलाव से भले ही कोई असर नहीं होगा लेकिन अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर दूर भेजे जाने वाले सैटेलाइट्स और स्पेसक्राफ्ट्स को दिशा देने के लिए धरती का सटीक ओरिएंटेशन पता होना बहुत जरूरी है। मिलीसेकंड का एक छोटा सा अंतर स्पेस में सैकड़ों किलोमीटर का भटकाव पैदा कर सकता है।

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