
विजय माल्या ने खुद को बेगुनाह बताते हुए भारतीय न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मेरे 6203 करोड़ रुपये के कोर्ट-ऑर्डर वाले कर्ज के बदले 14,100 करोड़ वसूल किए गए, फिर भी कहते हैं अपराधी, ये कैसा न्याय? किंगफिशर के मालिक विजय माल्या का दावा है कि उनका ब्रिटेन में बने रहना भारत आने पर लगी कानूनी रोक का हिस्सा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “जो लोग कहते हैं कि मैं भारत आने से इनकार करने वाला भगोड़ा हूं, उन्हें पता होना चाहिए कि मैं 1992 से यूनाइटेड किंगडम का स्थायी निवासी हूं और फिलहाल कानूनी तौर पर मुझे ये देश छोड़ने से रोका गया है। ये सब भारत सरकार की ‘पोस्टर बॉय’ वाली कार्रवाई से शुरू हुआ, जिन्होंने मेरे मामले में बहुत अन्याय किया है।”
उन्होंने कहा की जहां एक तरफ तो बड़े से बड़े कर्ज के सामने छोटी सी ममूली रकम लेकर कर्ज ख़त्म कर दिया जाता है, वहीं कुल कर्ज और ब्याज के आलावा भी मोटी रकम वसूल करने के बाद भी अपराधी और भगौड़ा घोषित किया जाता है, ये कैसा न्याय है? ये कौन सी कानून की किताब में लिखा है कि 6203 करोड़ रुपये के कोर्ट-ऑर्डर वाले कर्ज के बदले 14,100 करोड़ रुपये वसूल किए जाएँ और फिर भी भगौड़ा अपराधी घोधित किया जाए। और वहीं 22006.5 करोड़ रूपये के कर्जे के सामने केवल 6.5 करोड़ रूपये वसूले जाएँ और कर्जदार को क्लीनचिट दे दी जाए। ये तो वही कहावत सिद्ध हो रही है कि “अँधा बाँटे रेवड़ी, अपने अपने को दे।”
मंगलवार को एक पोस्ट में, माल्या ने एक कथित हलफनामे का हिस्सा शेयर किया। उन्होंने दावा किया कि “माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट में ED ने हलफनामा दायर किया है। पैरा 7 में कोर्ट के आदेश के तहत तय कर्ज का जिक्र है और पैरा 17 में 2021 में 14,131.60 करोड़ रुपये की रिकवरी दिखाई गई है। 5 साल बाद भी मुझे एक धोखेबाज कहा जाता है जिसने बैंकों को धोखा दिया।”
इससे पहले, अगस्त में माल्या ने फिर दावा किया था कि बैंकों ने उनसे बकाया राशि वसूल कर ली है, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। माल्या ने लिखा, “बैंकों और सरकार ने माना है कि उन्होंने 6203 करोड़ रुपये के कोर्ट-ऑर्डर वाले कर्ज के बदले मुझसे 14,100 करोड़ रुपये वसूल किए हैं। कई अन्य उधारकर्ताओं ने बहुत कम रकम पर समझौता किया है। शायद यही भारतीय कर्ज समाधान न्याय है। मीडिया का कोई सवाल नहीं।”










