बीरदेव सिद्धाप्पा बकरी चरा रहे थे, दोस्तों ने खेत में आकर उनको पटका और माला पहनाई और कहा कि तुम IPS बन गए 

बीरदेव सिद्धाप्पा बकरी चरा रहे थे तो दोस्तों ने खेत में आकर उनको पटका और माला पहनाई और कहा कि तुम IPS बन गए हो। यह कोई फिल्म की कहानी या सीन नहीं है बल्कि हकीक़त है। बीरदेव सिद्धाप्पा के पास कोई लग्जरी सुख सुविधाएं नहीं हैं। उनके पास एयरकंडीशन कमरे नहीं हैं। सरकारी स्कूल के बरांडे में बैठकर पढ़ने वाले चरवाहे के बेटे ने ये सिद्ध कर दिया कि सुख सुविधाओं का अभाव होते हुए भी सफलता हासिल की जा सकती है।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के कागल तहसील स्थित यमगे गांव के रहने वाले बीरदेव सिद्धाप्पा डोणे एक बेहद साधारण और चरवाहा परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बीरदेव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 551वीं रैंक (AIR 551) हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अपनी जगह पक्की की है।

बीरदेव के संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 22 अप्रैल को UPSC का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ, उस वक्त वे अपने गांव में किसी जश्न या लग्जरी कमरे में नहीं थे। वे अपने परिवार के साथ बेलगाम कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्र में खुले मैदानों में भेड़-बकरियां चरा रहे थे। अचानक एक दोस्त का फोन आया और उसने खबर दी कि बीरदेव ने UPSC परीक्षा क्रैक कर ली है। वहीं खेतों के बीच उनके दोस्तों और रिश्तेदारों ने बीरदेव को पारंपरिक ‘धनगरी फेटा’ (पगड़ी) पहनाकर सम्मानित किया और जीत का जश्न मनाया।

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