सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित, दोषियों को 7 से 10 साल की सजा और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान

नई दिल्ली।

सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित हो गया है। इसके लागु होने पर दोषियों को 7 से 10 साल की सजा और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है। लोकसभा से बुधवार और राज्यसभा से गुरुवार को पारित यह संशोधन विधेयक अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों से सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने का स्वागत करते हुए इसे पारदर्शी, विश्वसनीय और मजबूत परीक्षा व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक माफिया और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

राज्यसभा से विधेयक पारित होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार लंबे समय से सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि इसके तहत टास्क फोर्स का गठन, फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था, तकनीक का व्यापक उपयोग और राज्यों के सुझावों को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई दशकों से केंद्र और राज्य सरकारें पेपर लीक की समस्या से जूझ रही थीं, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट पैदा हो रहा था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार समय की मांग है। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेपर लीक माफिया और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “पेपर लीक माफिया या देश के बच्चों के भविष्य से खेलने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।”

राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून केवल प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में उत्तर कुंजी लीक, उत्तर पुस्तिकाओं और कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़, परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर, फर्जी वेबसाइट और एडमिट कार्ड तैयार करना तथा संगठित नकल जैसे सभी अपराध शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं को पारदर्शी, विश्वसनीय और योग्यता आधारित बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा हो सके।

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