
अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद दिए जाने वाले ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) वर्क परमिट पर ट्रंप प्रशासन 100,000 डॉलर (95 लाख रुपये) का शुल्क लागू करने की योजना बना रहा है। अगर यह लागू हो जाता है, तो इसका असर अमेरिका में अध्ययनरत 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों पर पड़ेगा।
OPT के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्र अपनी स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद एक साल तक अमेरिका में काम कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें वर्क वीजा की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और मैथ जैसे STEM क्षेत्रों के छात्रों को दो साल अतिरिक्त मिलते हैं। यानी STEM के छात्र तीन साल तक अमेरिका में काम कर सकते हैं। लेकिन यदि यह नया नियम लागू होता है तो इसके लिए उन्हें 100,000 डॉलर का शुल्क देना होगा जोकि अधिकांश परिवारों के लिए सम्भव नहीं हो पायेगा।
OPT ही वह मुख्य वजह है कि इतने सारे भारतीय अमेरिका को चुनते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि OPT में भारतीयों की भागीदारी एक ही वर्ष में 47 प्रतिशत बढ़ गई है, और अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत भारतीय छात्र इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। ओपन डोर्स की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी संस्थानों में नामांकित थे। यह दुनिया के किसी भी देश से अधिक है, यहां तक कि चीन से भी आगे। उस वर्ष अमेरिका में सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से लगभग एक तिहाई भारतीय छात्र थे।











