राजस्थान में भजनलाल की सरकार ने “पेड़ संरक्षण” और “समान नागरिक संहिता” के विधेयक मंजूर किए, आगामी विधानसभा सत्र में होंगे पेश

जयपुर।

राजस्थान में भजनलाल की सरकार ने “पेड़ संरक्षण” और “समान नागरिक संहिता” के विधेयकों को मंजूरी दे दी है। इन्हें राजस्थान विधानसभा के 20 अगस्त से आरम्भ होने वाले सत्र में पेश किया जायेगा जिससे इसे कानून बनाया जा सके। दोनों ही बिल महत्वपूर्ण हैं।

पेड़ संरक्षण विधेयक में पेड़ों के काटने पर पाबंदी लगाई जाएगी जिससे पर्यावरण की रक्षा की जा सके। राजस्थान में जनसँख्या के आधार पर प्रति व्यक्ति पेड़ो की संख्या सबसे कम है, जबकि क्षेत्रफल के आधार पर उससे भी कम है। हालांकि राजस्थान में रेगिस्तान होने के कारण भी पेड़ों की संख्या कम है, परन्तु सरकारी संरक्षण और नागरिकों की जागरूकता से ये संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विधेयक तैयार किये हैं।

इसके पास होने के बाद कहीं भी पेड़ काटना अपराध माना जायेगा और उस राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन एक्ट में दोषी पाए जाने पर 1 लाख रुपए का जुर्माने और 1 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। व्यक्तिगत भूमि (500 मीटर तक छोड़कर) पर भी यह कानून लागू होगा। यदि कहीं पेड़ काटना अति आवश्यक है तो उसके लिए उस क्षेत्र के सम्बंधित अधिकारी से लिखित अनुमति लेना आवश्यक होगा। अधिकारी मौके का मुआयना करेंगें और उच्च कार्यालय को रिपोर्ट सौंपेंगे।

कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने जानकारी दी कि उत्तराखंड, गुजरात, असम का अध्ययन करने में बाद राजस्थान में UCC कानून का अनुमोदन किया. जोगाराम पटेल ने कहा कि इस एक्ट के तहत तलाक, उत्तराधिकार, भरण पोषण, लिव-इन रिलेशनशिप व्यवस्था को व्यस्थित बनाना है। इस एक्ट से आदिवासी और जनजाति क्षेत्र के रीति रिवाजों को बाहर रखा गया है।

यूसीसी कानून के तहत सभी को विवाह का रजिस्ट्रेशन 60 दिन में कराना अनिवार्य होगा। लिव-इन रिलेशनशिप की शुरूआत और समाप्ति की भी जानकारी देनी होगी। वहीं तलाक का रजिस्ट्रेशन भी जरूरी होगा। साथ ही रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
कानून मंत्री ने कहा कि प्रदेश में यूसीसी कानून बनने के बाद बहुविवाह (एक से ज्यादा शादी) पूर्ण प्रतिबंधित होगी। हालांकि पुर्नविवाह करने में पूरी छूट रहेगी. पहले कई समुदायों में पुर्नविवाह प्रतिबंधित था। उत्तराधिकार के तहत सभी धर्मों में अब पुत्र-पुत्रियों को समान अधिकार मिलेगा। पहले कई कानूनों में पुत्र को ज्यादा संपत्ति का प्रावधान था।

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