
सावन के तीसरे सोमवार का यह पर्व कई धार्मिक संयोगों के कारण और भी विशेष हो गया है। सोमवार को नागपंचमी तिथि का संयोग है। इसी दिन सिंह संक्रांति और मां मनसा की वार्षिक पूजा भी हो रही है। वहीं, बांग्ला श्रावण का समापन भी सोमवार को हो रहा है। इन धार्मिक अवसरों के एक साथ आने से बाबा धाम में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण और गहरा हो गया है। सावन के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में लगाई गई विशेष बिल्वपत्र प्रदर्शनी का भी सोमवार को समापन हो रहा है। श्रद्धालुओं के लिए बिल्वपत्र भगवान शिव की आराधना का विशेष माध्यम माना जाता है। प्रदर्शनी के प्रति भी भक्तों में खासा उत्साह देखा गया।
सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 108 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ भी ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। गेरुआ वस्त्र पहने कांवरियों का जत्था पवित्र गंगाजल लेकर बाबा धाम पहुंचे और अर्पित किया। बारिश की रिमझिम के बीच कंधे पर कांवर और मन में बाबा के प्रति अटूट आस्था लिए श्रद्धालु कठिन पैदल यात्रा के बाद देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ पर गंगाजल अर्पित किया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार रात करीब 10.30 बजे ही कतार लगभग पांच किलोमीटर तक पहुंच गई थी। रात बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। सोमवार सुबह कतार 12 किलोमीटर से अधिक लंबी हो गई। बाबा बैद्यनाथ धाम में इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी पर 3,17,494 श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया था। दूसरी सोमवारी पर यह संख्या बढ़कर 3,69,449 हो गई थी। तीसरी सोमवारी पर करीब चार लाख श्रद्धालुओं के बाबा पर जलाभिषेक करने का अनुमान है।











