
नई दिल्ली।
नेपाल के लिए भारत का पांचवां विमान रवाना हो गया। इसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष चिकित्सा उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजी गईं। 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की ओर से मदद लगातार जारी है।
नेपाल की मदद के लिए भारत अब तक 68 टन से अधिक राहत सामग्री और विशेष बचाव दल भेज चुका है। भेजी गई राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, मजबूत तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं। इसके अलावा जरूरी दवाइयां, खाद्य पैकेट, सोलर लैंप, पानी शुद्ध करने की गोलियां और पोर्टेबल जनरेटर भी भेजे गए हैं। इससे पहले मंगलवार को नेपाल के अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या एक हजार से अधिक हो गई है। अलग-अलग जिलों में नदियों के किनारे लगातार शव मिलने के कारण यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, अब तक 1003 शव बरामद किए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा 321 शव चितवन जिले में मिले हैं, जबकि 216 शव नवलपरासी पूर्व जिले में बरामद हुए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, 4,606 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इससे आशंका है कि मृतकों की संख्या आगे और बढ़ सकती है।
नेपाल सरकार ने बताया कि रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं में लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन ने जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की खोज और बचाव में मदद के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं। इस बीच, भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने नेपाल के विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच शुरू कर दी है।








