विश्व नारियल दिवस 2 सितम्बर : ‘कल्पवृक्ष’ के रूप में पहचाना जाता है नारियल, करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन

भारत दुनिया के प्रमुख नारियल उत्पादक देशों में शामिल है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गोवा और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में भी नारियल उत्पादन किया जाता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए नारियल विशेष महत्व रखता है। कई किसान इसे अन्य फसलों के साथ मिश्रित खेती के तौर पर अपनाते हैं। लंबे समय तक उत्पादन देने की क्षमता के कारण नारियल का पेड़ किसानों के लिए अपेक्षाकृत स्थायी आय का स्रोत भी बन सकता है।

विश्व नारियल दिवस की शुरुआत एशिया और प्रशांत क्षेत्र में नारियल के आर्थिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से हुई। 2 सितंबर की तारीख एशियन एंड पैसिफिक कोकोनट कम्युनिटी (APCC) की स्थापना से जुड़ी है। इस दिवस का उद्देश्य नारियल उत्पादन, प्रसंस्करण और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के साथ उत्पादक देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है।

समुद्र की लहरों से लेकर खेतों की मेड़ों तक अपनी पहचान बनाने वाला नारियल भारत समेत दुनिया के कई उष्णकटिबंधीय देशों में सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम आधार है। ‘कल्पवृक्ष’ के रूप में पहचाना जाने वाला नारियल अपने फल, पानी और गिरी से आगे बढ़कर तेल, रेशा, खोल, पत्तियों और तने तक हर हिस्से के उपयोग के कारण खेती से उद्योग और स्थानीय बाजार से वैश्विक कारोबार तक एक व्यापक आर्थिक श्रृंखला तैयार करता है।

नारियल की सबसे बड़ी खासियत इसका बहुआयामी उपयोग है। कच्चे नारियल का पानी प्राकृतिक पेय के रूप में इस्तेमाल होता है, जबकि गिरी से खाद्य पदार्थ और तेल तैयार किए जाते हैं। नारियल के छिलके से निकलने वाले रेशे यानी कोयर से रस्सियां, चटाइयां, ब्रश, मैट और कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। खोल का इस्तेमाल ईंधन, चारकोल और हस्तशिल्प में होता है। पत्तियों और तने का भी ग्रामीण तथा पारंपरिक जीवन में लंबे समय से उपयोग होता रहा है।

स्वास्थ्य और प्राकृतिक पेय पदार्थों के प्रति बढ़ती रुचि के साथ नारियल पानी की मांग में भी विस्तार हुआ है। नारियल तेल भारतीय घरों में खाना पकाने और बालों की देखभाल के लिए लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उद्योग में भी नारियल आधारित तेल की मांग है। नारियल दूध, नारियल पाउडर, नारियल चिप्स और वर्जिन कोकोनट ऑयल आदि प्रमुख उत्पाद हैं।

नारियल के छिलके से मिलने वाला रेशा कोयर उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है। इससे रस्सी, चटाई, ब्रश, मैट और सजावटी वस्तुओं सहित अनेक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। भारत में नारियल आधारित उत्पादों की घरेलू मांग के साथ निर्यात की भी व्यापक संभावनाएं हैं। कोयर उत्पाद, नारियल तेल, नारियल पानी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बना सकते हैं।

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