
अयोध्या।
राम मंदिर के पहले CEO के ऐलान के साथ ही मंदिर से जुड़ी व्यवस्था में भारी बदलाव किए गए हैं। रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। दो आईपीएस और एक आईएएस के नामों की चर्चा के बीच एक रिटायर सेना अधिकारी को चुना जाना अहम रणनीतिक निर्णय के रूप में भी देखा जा रहा है। रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर में भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं।
बेदाग और सेना के शौर्य से जुड़े व्यक्ति को राम मंदिर ट्रस्ट में CEO जैसे अहम पद पर बैठाना मतलब आलोचकों को सीधे चुप कर देना भी है। चंपत राय की जगह अब गोविंद देव गिरी पूर्णकालिक/स्थायी महासचिव होंगे, यह एक एक बड़ा निर्णय था जो बैठक के एजेंडा में भी नहीं था। राम मंदिर के पहले CEO अब सीधे महासचिव को रिपोर्ट करेंगे, मतलब अब राम मंदिर ट्रस्ट में गोविंद देव गिरी ही सुप्रीम पॉवर होंगे। जैसा कि पहले भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी आई है और CEO की नियुक्ति के समय जारी पात्रता तथा उनसे अपेक्षा में भी बताया दिया गया था, जिससे यह बात साफ हुई कि राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी प्रबंधन और संचालन संबंधित सभी कार्यों को कमांड, कंट्रोल और कोऑर्डिनेट करने की होगी।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने बताया कि नवनियुक्त CEO एक-दो दिन में अयोध्या पहुंचेंगे। पहले वह राम लला के दर्शन करेंगे और फिर ट्रस्ट के लोगों के साथ चर्चा कर चीजों को समझेंगे। उसके बाद अपना कार्यभार संभालेंगे. बतौर विहिप महासचिव चयन की प्रक्रिया में हर नाम पर विस्तृत चर्चा और मूल्यांकन करने के बाद ही 3 सदस्यीय चयन समिति ने 3 नाम ट्रस्ट को सौंपे थे जिसमें सबसे ऊपर जीतेंद्र मिश्रा का नाम था और उस पर सार्वजनिक सहमति भी बनी।
बागड़ा ने कहा कि चंपत राय अब 82 साल के हो चुके हैं। संगठन में दायित्व उम्र और अवस्था देख कर तय की जाती है। ऐसे में चंपत राय अभी भी विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं जो किसी भी ट्रस्ट के महासचिव पद से कहीं बड़ा पद है। चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष रहते हुए संगठन उनके लिए जो भी दायित्व आगे तय करेगा उसमें सक्रिय दिखेंगे।












