पीएम मोदी ने जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनभागीदारी के साथ “जल उत्सव” अभियान चलाने का सुझाव दिया

नई दिल्ली।

पीएम मोदी ने जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनभागीदारी के साथ “जल उत्सव” अभियान चलाने का सुझाव दिया है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह प्रधानमंत्री की परिकल्पना के तहत आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलनों की पहली श्रृंखला है, जिसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को मजबूत करना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सामूहिक भागीदारी बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक बार होने वाला कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि इसकी सिफारिशों पर निरंतर समीक्षा और फॉलो-अप की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

जनभागीदारी पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने “जल उत्सव” अभियान चलाने का सुझाव दिया, जिससे लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। उन्होंने जलाशयों की नियमित डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) को अभियान का हिस्सा बनाने और इसके लिए स्पष्ट मानक एवं एसओपी तैयार करने की बात कही। बांध सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने हर मानसून से पहले पूरी तैयारी, सुरक्षा मानकों के पालन और स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी जल एवं बांध सुरक्षा से जुड़े विषय शामिल करने पर जोर दिया।

उन्होंने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन एवं जल शासन से जुड़े ज्ञान और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही राज्यों के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के अध्ययन दौरे आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि सफल मॉडलों को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सके।

उन्होंने तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और भविष्य की जल आवश्यकताओं को देखते हुए शहरी स्थानीय निकायों को जल प्रबंधन के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। साथ ही, शहरी निकायों के लिए भी ऐसे चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। पीएम मोदी ने जल बचाने वाली आधुनिक तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित कराने के लिए प्रदर्शनी और कार्यशालाएं आयोजित करने का भी सुझाव दिया, ताकि भारतीय निर्माता और अन्य हितधारक प्रभावी समाधान विकसित कर सकें।

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