
फिरोजाबाद,
साहित्यिक व सामाजिक संस्था बज़्मे फ़रोग़े अदब रजि० फ़ीरोज़ाबाद का रजिस्ट्रेशन होने की खुशी में बज़्म के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह और शिक्षक दिवस पर उस्तादों(गुरुओं) का सम्मान कार्यक्रम शीतल खां रोड़ चिराग़ सोसायटी कार्यालय पर 3 बजे दोपहर में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम उस्तादों (गुरुओं) का सम्मान फूल माला,पगड़ी और शाल ओढ़ाकर किया गया ।फिर बज़्म के सभी सदस्यों का सम्मान किया गया। तदोपरांत साहित्यिक मुशायरे का आयोजन भी किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता व उदघाटन समाज सेवी डा० शमीम अहमद खांन ने किया । शमा रौशन मशहूर उस्ताद शायर मोहसिन अब्बास ने की। मुख्य अतिथि डा०ज़फर आलम और जानशीने उस्ताद एम ऐ खार रिज़वान अंसारी और उस्ताद शायर ज़ीरो वांदवी थे।
मशहूर उस्तादों में मोहसिन अब्बास साहब और रिज़वान अन्सारी साहब को उनकी अदबी ख़िदमात और शायराना सलाहियत, फ़ने- शायरी और रुबाईयात पर उबूर हासिल के लिये सम्मान किया गया।
उसके बाद मुशायरा आरम्भ हुआ। संचालन इरफान साहिल ने किया।
कमर वारसी ने नाते नबी में यूं कहा–
“परवाज़ रूह कर गयी हज़रत बिलाल की
जिस वक्त आया नामे मुहम्मद अज़ान में ”
उसके बाद शायर अमजद रज़ा ने ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा–
“मिट्टी पै लिखना मिट्टी से मिट्टी नहीं कमाल
पानी पै नाम पानी से लिखना कमाल है ”
शायर कलीम नूरी की ग़ज़लें सुनकर श्रोता वाह वाह करने पर मजबूर होते दिखे उन्होंने यूं कहा–
“तुम्हैं खुलूसो मुहब्बत गवारा था ही नहीं
तुम्हारे साथ हमारा गुज़ारा था ही नहीं ”
चाहत फीरोजाबादी ने शेर पढ़ा—
” यहां सभी के मुक़द्दर कहां बदलते हैं
किसी किसी के हवा में चिराग़ जलते हैं ”
शायर असलम अदीब ने शाह सूफी की शान में यूँ कहा—–
“उस के अहसान थे बहुत मुझ पर
उसने रक्खा दबा दबा के मुझे”
हाजी ऐजाज ने फ़रमाया—
“ज़रूरत जब भी पड़ती है ख़ुदा से मांग लेता हूं
किसी के सामने मैं हाथ फैलाने नहीं जाता,”
उम्र पैकर ने ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा
” ये माना टूटी फूटी है हवेली ये पुरानी है
मगर मैं बेच दूं कैसे बुजुर्गों की निशानी है ”
मंज़र नवाब ने अपना दर्द यूँ बयां किया—–
“गलत कहते हैं सब ससुराल में आराम मिलता है
हमैं तो कै़द खाने में बड़ी तकलीफ़ होती है”
हास्य व्यंग के मशहूर उस्ताद शायर जीरो बांदवी साहब ने पब्लिक को खूब ह़साया उन्होने कहा–
“जिस गांव का नक्शे में कहीं नाम नहीं है
उस गांव के प्रधान हैं मेरे बड़े भाई ”
फने उरूज़ के माहिर शायर रिज़वान अन्सारी (जानशीने खार)
ने बेहतरीन शेर पढ़े …
“ज़िन्दगी कल तलक रहे न रहे
आज जी भर के जीत लिया जाए”
उस्ताद शायर मोहसिन अब्बास साहब ने की रूबाईं पढ़ी लोगों ने भरपूर दाद दी ये शेर खूब पसंद किया गया।
” गीली आंखों में सुलगते ग़म का मंज़र रख लिया
मैंने भी उस से बिछड़ कर दिल पै पत्थर रख लिया”
सभी शायरौं ने अपने कलाम से खूब वाह वाही लूटी , मुशायरा दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक चला।
अंत में मुख्य अतिथि डा ज़फ़र आलम ने कहा कि मुशायरे सामाजिक ऐकता का स़देश देते हैं, इन से समाज में भाई चारे का पैगाम पहुंचता है । ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिये। आज के मुशायरे में शायरौं ने अपने कविता से भाई चारे का संदेश दिया है। मुशायरा के अध्यक्ष डाक्टर शमीम अहमद खान ने बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के कार्यक्रम की सराहना की। शायरौं ने बेहतरीन कलाम पेश किये हैं।मुशायरा बहुत कामयाब रहा है, असलम अदीब बधाई के पात्र है।
मोहसिन अब्बास साहब ने कहा कि तबीयत अलील रहते हुए भी
आज असलम अदीब की मुहब्बत मुझे इस कार्यक्रम में खींच लाई है। मैं बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब का शुक्रिया अदा करता हूं आज मेरा सम्मान हुआ है यक़ीनन खुशी की बात है।
रिज़वान अन्सारी साहब ने कहा कि आज की सालों बाद बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के अराकीन की मुहब्बत ने मुझे आज के इस बेहतरीन कार्यक्रम में बुला लिया। बहुत शानदार कार्यक्रम रहा बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब बधाई की पात्र है।
मुशायरा का सफल संचालन मशहूर शायर इरफान साहिल ने किया। मुख्तार आलम,रहीस भाई, अमजद रज़ा,साहिल खान,
अली मियां, उमर साहब,रफीक मियां आद की उपस्थिति सराहनीय रही।









