भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब जटिल चंद्र, सौर और मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों तक पहुंचा

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब जटिल चंद्र, सौर और मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों तक पहुंच चुका है। जनवरी 2025 में SpaDeX मिशन ने स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग की क्षमता का प्रदर्शन किया। यह तकनीक भविष्य के जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और इससे भारत की ऑर्बिटल डॉकिंग क्षमता मजबूत हुई है।

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 अरब डॉलर की मौजूदा भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के 2030 तक लगभग पांच गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इससे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी करीब 8% हो सकती है। सरकार ने 2040 तक 100 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बनाने का दीर्घकालिक लक्ष्य भी रखा है।

Skyroot Aerospace, Pixxel, Agnikul Cosmos और Dhruva Space जैसी कंपनियां लॉन्च व्हीकल, उपग्रह, पृथ्वी अवलोकन प्रणाली और अन्य अंतरिक्ष तकनीकों पर काम कर रही हैं। Skyroot का Vikram-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

भारत गगनयान मिशन की तैयारी भी कर रहा है, जिसका उद्देश्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में तीन दिनों तक भेजना है। प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को 2028 तक स्थापित करने का लक्ष्य है। यह स्टेशन लंबे समय तक मानव अंतरिक्ष अभियानों और माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान में मदद कर सकता है।

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