दिल्ली में आयोजित सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण ‘सेमीकॉन 2.0’ के तहत 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव मिले

सेमीकॉन इंडिया 2026 में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि ये निवेश प्रतिबद्धताएं सेमीकंडक्टर उपकरण, मटेरियल्स, गैस, केमिकल्स और सब्सट्रेट्स जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इन निवेशों के अगले दो से तीन वर्षों में जमीन पर उतरने की उम्मीद है।

मंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए स्थान का चयन करना कंपनियों का विशेषाधिकार है। कंपनियां यह निर्णय इस आधार पर लेती हैं कि उन्हें कहां नीतिगत स्थिरता, सरकारी सहयोग और मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “उद्योग यह तय करता है कि वह किस स्थान को चुनेगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें कहां अधिक सहजता महसूस होती है, कितनी नीतिगत निश्चितता दिखाई देती है और सरकार व अन्य क्षेत्रों से किस तरह का सहयोग मिलता है।”

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने फुजीफिल्म के साथ महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर मटेरियल्स के स्थानीयकरण तथा जेएसआर कॉरपोरेशन के साथ फोटोरेजिस्ट और उन्नत रसायनों की आपूर्ति को लेकर भी समझौते किए हैं, जिनका उपयोग धोलेरा फैब प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 योजना लगभग 4 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश आकर्षित कर सकती है।

यह डिजाइन, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और प्रतिभा विकास के क्षेत्रों में भी गहराई लाने में मदद करेगी। योजना के तहत सिलिकॉन फैब परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत पूंजीगत व्यय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं अनुसंधान, विकास और प्रतिभा विकास पहलों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से मिलाकर 75 प्रतिशत तक सहायता प्रदान की जा सकती है।

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