
जूस की दुकान पर काम करके 15000 रूपये महीने कमाने वाले सौरभ चंद्राकर ने अपनी शादी में 200 करोड़ रूपये खर्च किए। दिसंबर 2020 तक सौरभ छोटे स्तर पर सट्टेबाजी के काम से जुड़ा और इतनी तेजी से तरक्की करके सट्टा कारोबार से 94 हजार करोड़ कमा डाले।
सौरभ चंद्राकर के परिवार का पहले भिलाई में जूस की दुकान चलाता था। इस दुकान का नाम ‘जूस फैक्ट्री’ था। सौरभ भी इस दुकान पर काम करता था। उसके चाचा के बयान के मुताबिक, उसे हर महीने करीब 15 हजार रुपये मिलते थे।
जांच में सामने आए बयानों के अनुसार, दिसंबर 2020 तक सौरभ छोटे स्तर पर सट्टेबाजी के काम से जुड़ा था। इसके बाद महादेव ऑनलाइन बुक का कारोबार तेजी से बढ़ा। ED का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन दांव लगवाए जाते थे।
ED की जांच के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक का हेड क्वार्टर दुबई में था। वहां से सट्टेबाजी के पूरे नेटवर्क को चलाया जाता था। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग लोगों को सट्टेबाजी के पैनल दिए जाते थे। एक पैनल लेने के लिए ऑपरेटर को शुरुआत में करीब 15 से 20 लाख रुपये देने पड़ते थे। इसके बाद उसे बैंक खाते, मोबाइल फोन, इंटरनेट और कर्मचारियों का इंतजाम खुद करना होता था।
खिलाड़ियों को जोड़ने के लिए WhatsApp, Telegram, सोशल मीडिया और कॉल सेंटर का इस्तेमाल किया जाता था। लोगों को बोनस और बड़े मुनाफे का लालच देकर सट्टेबाजी की ओर खींचने का आरोप है। ED के अनुमान के मुताबिक, भारत और UAE में करीब 3,200 पैनल काम कर रहे थे। पैनल से होने वाले मुनाफे का 70 से 80 फीसदी हिस्सा दुबई स्थित सट्टे के हेड क्वार्टर तक पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था में खिलाड़ियों के बड़े दांव जीतने पर उनकी यूजर आईडी बंद कर दी जाती थी, जिससे उन्हें अपनी रकम निकालने में परेशानी होती थी।
ED के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिले पैसे को छिपाने के लिए दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए। कुछ खाते कथित तौर पर धोखे से मिले पहचान पत्रों के आधार पर खोले गए, जबकि कुछ खाते कमीशन देकर इस्तेमाल किए गए। इन खातों में खिलाड़ियों से मिली रकम जमा की जाती थी। इसके बाद कई खातों के जरिए पैसे को अलग-अलग जगह भेजा जाता था। कुछ रकम नकद निकाली जाती थी और हवाला के जरिए विदेश भेजे जाने का आरोप है।
जांच में दुबई की कंपनियों, विदेश में खरीदी गई संपत्तियों और भारतीय शेयर बाजार में निवेश का भी पता चला। ED का कहना है कि सट्टेबाजी से मिली रकम को असली कारोबार से हुई कमाई दिखाने के लिए अलग-अलग कंपनियों और खातों का इस्तेमाल किया गया।
सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह में शादी हुई थी। सौरभ का हरशिता से विवाह हुआ। शादी के सभी कार्यक्रम 10 से 14 फरवरी के बीच आयोजित किए गए थे। ED के मुताबिक, शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए। शादी में मेहमानों को लाने के लिए चार्टर्ड विमान और दूसरे निजी विमानों का इस्तेमाल किया गया। मेहमानों के होटल, यात्रा और रहने का खर्च भी उठाया गया।
महादेव ऑनलाइन बुक मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी जांच में आया है। ED और दूसरी जांच एजेंसियों के दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि सट्टेबाजी के कारोबार को चलाने के लिए कुछ अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक पैसे पहुंचाए गए।
जांच में पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक चंद्रभूषण वर्मा, पैनल ऑपरेटर सतीश चंद्राकर और हवाला कारोबार से जुड़े अनिल तथा सुनील दम्मानी के बयानों का जिक्र है। दस्तावेजों के मुताबिक, सतीश चंद्राकर ने दावा किया कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच करीब 81 करोड़ रुपये अलग-अलग लोगों और जगहों तक पहुंचाए गए। इसमें मुख्यमंत्री आवास, अधिकारियों और दूसरे लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं। शुभम सोनी के एक ईमेल में भी राजनीतिक लोगों को कथित भुगतान का दावा किया गया था। ईमेल में भूपेश बघेल का नाम लेकर करीब 508 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप लगाया गया।








