
नई दिल्ली।
आज 7 मई को “विश्व एथलेटिक्स दिवस” “World Athletics Day” मनाया जा रहा है। यह दिन 1996 में IAAF (अब वर्ल्ड एथलेटिक्स) के पूर्व अध्यक्ष प्राइमो नेबियोलो द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य युवाओं को ट्रैक एंड फील्ड खेलों के प्रति प्रेरित करना और शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। 1996 में शुरू किया गया, यह दिन एथलेटिक्स को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव की असीम संभावनाओं, अनुशासन, आत्मसंयम और अटूट संकल्प का सजीव प्रतीक है। यह हमें स्मरण कराता है कि मनुष्य का अस्तित्व मात्र जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह निरंतर आत्म विकास और उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए बना है। एथलेटिक्स केवल शारीरिक सामर्थ्य का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, आत्मनियंत्रण और धैर्य की चरम अभिव्यक्ति भी है। “तेज, ऊंचा और अधिक शक्तिशाली” (Citius, Altius, Fortius) का आदर्श इसी समग्र मानवीय उत्कर्ष की भावना को सार्थक रूप में अभिव्यक्त करता है।
एथलेटिक्स का इतिहास उतना ही प्राचीन और व्यापक है जितना स्वयं मानव सभ्यता का विकास। इसके संगठित स्वरूप की स्पष्ट शुरुआत प्राचीन यूनान में मानी जाती है, जहां 776 ईसा पूर्व में आयोजित प्रथम ओलंपिक खेलों ने इसे एक सुव्यवस्थित पहचान प्रदान की। इन प्राचीन ओलंपिक प्रतियोगिताओं का मुख्य आकर्षण एथलेटिक्स ही था, जिसमें ‘स्टेडियन दौड़’ विशेष रूप से उल्लेखनीय थी। यही दौड़ आधुनिक स्प्रिंट प्रतियोगिताओं की पूर्वज मानी जाती है।











