
नई दिल्ली।
आज के समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और कूटनीति के केंद्र तेजी से बदल रहे हैं। इसी संक्रमणकाल में BRICS ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक वैकल्पिक शक्ति के केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।
साल 2009 में आर्थिक सहयोग मंच के रूप में प्रारंभ हुआ BRICS आज केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन को पुनर्परिभाषित करने वाला एक प्रभावशाली मंच बन चुका है। पश्चिमी संस्थाओं जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और G7 की नीतियों से असंतुष्ट विकासशील देशों के लिए BRICS नई संभावनाओं और वैकल्पिक वैश्विक नेतृत्व की आशा प्रस्तुत करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उन देशों की आवाज़ को मंच प्रदान करता है जिन्हें लंबे समय तक वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
भारत के लिए BRICS का महत्व केवल आर्थिक या कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और वैचारिक भी है। यह मंच भारत को “वैश्विक दक्षिण” की आवाज़, “विश्वबंधु” और “संतुलनकारी शक्ति” के रूप में अपनी भूमिका को व्यवहारिक स्वरूप देने का अवसर प्रदान करता है। एक ओर भारत QUAD जैसे पश्चिम समर्थित रणनीतिक मंचों का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर BRICS और SCO जैसे समूहों में सक्रिय भूमिका निभाकर वह अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” का परिचय देता है।
आज BRICS विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक GDP के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। हाल के वर्षों में इसके विस्तार ने इसे और प्रभावशाली बनाया है। नए देशों के जुड़ने से यह मंच ऊर्जा, व्यापार और भू-राजनीतिक स्तर पर अधिक व्यापक शक्ति संरचना में परिवर्तित हो रहा है। BRICS अब IMF और विश्व बैंक जैसी पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठा रहा है। विकासशील देशों का लंबे समय से आरोप रहा है कि ये संस्थाएं पश्चिमी हितों के अनुरूप संचालित होती हैं।
BRICS इसी असंतोष को राजनीतिक अभिव्यक्ति प्रदान करता है।भारत इस परिवर्तन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। चीन जहां BRICS को अमेरिकी वर्चस्व के विरुद्ध एक मजबूत धुरी के रूप में देखता है, वहीं भारत इसे “समानता आधारित बहुध्रुवीय व्यवस्था” का मंच बनाना चाहता है। भारत की दृष्टि में BRICS किसी एक शक्ति केंद्र के विरुद्ध गठबंधन नहीं, बल्कि संतुलित वैश्विक व्यवस्था की दिशा में प्रयास है।
भारत ने हाल के वर्षों में स्वयं को इन देशों की आवाज़ के रूप में स्थापित करने का गंभीर प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने “One Earth, One Family, One Future” का संदेश देकर गरीबी, जलवायु न्याय, खाद्य सुरक्षा और ऋण संकट जैसे मुद्दों को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास किया। BRICS इस रणनीति को और व्यापक आयाम प्रदान करता है।
अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के देशों के साथ भारत की बढ़ती निकटता इसी नीति का हिस्सा है। भारत इन देशों के साथ केवल व्यापारिक संबंध नहीं बना रहा, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सहयोग और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भी भागीदारी बढ़ा रहा है। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी “सॉफ्ट पावर” है। लोकतांत्रिक व्यवस्था, सांस्कृतिक विविधता, योग, आयुर्वेद, आईटी क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण उसे चीन से अलग पहचान देते हैं। BRICS में भारत इसी लोकतांत्रिक और मानवीय नेतृत्व मॉडल को प्रस्तुत करता है।










